अल्मोड़ा नगर पंचायत के बाड़ीकोट में बीते दिन सात वर्षीय बालिका को निवाला बनाने वाला तेंदुआ हाथ नहीं आ रहा है। आदमखोर तेंदुए ने बृहस्पतिवार की रात एक बछड़े को मार डाला। इस बीच सर्च अभियान में जुटे शिकारी जहीर बख्श ने तेंदुए पर फायर झोंका, लेकिन तेंदुआ जंगल की ओर भाग गया। इधर शुक्रवार को गैरसैंण से प्रसिद्ध शिकारी लखपत सिंह रावत भी बाड़ीकोट पहुंच गए हैं।
वन दरोगा संजय रावत ने बताया कि बाड़ीकोट में तेंदुए ने एक लावारिस बछड़े को मार डाला। बृहस्पतिवार देर रात वह अपने शिकार के पास पहुंचा तो दूसरे छोर से सर्च कर रहे शिकारी और वन विभाग टीम की नजर तेंदुए पर पड़ गई। शिकारी जहीर बख्श की बंदूक से निकली पहली गोली मिस हो गई। दस मिनट बाद दूसरी गोली दागी। गोली तो निशाने पर नहीं लगी, लेकिन तेंदुआ दहाड़ता हुआ जंगल की ओर भाग खड़ा हुआ। उसके बाद टीम ने कांबिंग कर गधेरों और जंगल में तेंदुए की खोज की।
इधर, शुक्रवार शाम गैरसैंण से शिकारी लखपत सिंह भी मौके पर पहुंच गए। वह भी जहीर बख्श के साथ मोर्चा संभालेंगे। पूर्व में पहुंचे चार शिकारी देहरादून लौट गए हैं। इधर, कोटियाग गांव के ग्रामीणों ने एसडीएम राहुल शाह को ज्ञापन देकर गांव में तेंदुए के आतंक से निजात दिलाने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा कि कोटियाग गांव में जीवन सिंह की चार बकरियां, भुवन चंद्र की दो बकरियां, पूरन सिंह की भैंस का बछड़ा, बंशीधर के दो पालतू कुत्तों को तेंदुए ने निवाला बना लिया है। महिलाएं खेतों में काम पर जाने से डर रही हैं। उन्होंने गांव में पिंजरा लगाने की मांग की है। वहां प्रधान राधिका देवी, पूरन मावड़ी, जीवन सिंह, भुवन चंद्र, मोहन सिंह, कमल सिंह आदि थे।