बिल्डर्स फर्म के कार्यालय से दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि बिल्डर्स ने फ्लैट बिक्री पर जीएसटी का भुगतान निर्माण के लिए की गई खरीद पर उपलब्ध आईटीसी में समायोजन से किया गया था, जबकि फर्म की जीएसटी देयता का भुगतान नकद रूप में कर जमा कर किया जाना था।
राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा ने जीएसएटी जमा न करने पर बिल्डर्स व कन्फेक्शनरी व्यापारी पर छापामारी कर 3.25 करोड़ रुपये राजकोष में जमा कराए। कार्रवाई के दौरान विभागीय टीम ने जीएसटी से संबंधित दस्तावेज कब्जे में लिए हैं, जिनकी जांच जारी है। प्रारंभिक जांच में बिल्डर्स फर्म पर 12.50 करोड़ जीएसटी जमा न करने का आकलन किया गया।
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राज्य कर आयुक्त प्रतीक जैन के निर्देश पर संयुक्त आयुक्त अजय सिंह ने टीम बनाकर बिल्डर्स व कन्फेक्शनरी व्यापारी पर कार्रवाई की। बिल्डर्स फर्म के कार्यालय से दस्तावेजों की जांच में पाया गया कि बिल्डर्स ने फ्लैट बिक्री पर जीएसटी का भुगतान निर्माण के लिए की गई खरीद पर उपलब्ध आईटीसी में समायोजन से किया गया था, जबकि फर्म की जीएसटी देयता का भुगतान नकद रूप में कर जमा कर किया जाना था। बिल्डर्स को जीएसटी का भुगतान आईटीसी के माध्यम से मान्य नहीं है।
उपायुक्त सुरेश कुमार ने बताया कि रेरा, एमडीडीए व अन्य संबंधित विभागों से दस्तावेजों और जीएसटी पोर्टल के डाटा विश्लेषण कर विभाग ने कार्रवाई की है। बिल्डर्स ने जीएसटी भुगतान की गलती को स्वीकार कर मौके पर 2.25 करोड़ जमा कराए। इसके अलावा कन्फेक्शनरी व्यापारी की ओर से गलत तरीके से आईटीसी का लाभ लिया जा रहा है। व्यापारी ने कार्रवाई दौरान एक करोड़ रुपये जमा किए। उन्होंने जीएसटी चोरी के खिलाफ कार्रवाई जारी है।