उत्तराखंड में मानव वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए प्रदेश में गांवों के स्तर पर स्वयंसेवकों की सेना तैयार करने की वन विभाग ने मुहिम शुरू कर दी है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने इसके लिए दिशा निर्देश जारी किए हैं और सभी प्रभागीय वन अधिकारियों को 30 नवंबर तक गांवों का चयन करने का आदेश दिया है। यह भी तय कर लिया गया है कि स्वयं सेवकों की इस सेना में शामिल होने वाले युवाओं को मानदेय भी दिया जाएगा और उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था भी वन विभाग करेगा।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने सभी प्रभागीय वन अधिकारियों से कहा है कि 30 नवंबर तक गांवों की सूची फाइनल हो जाने के बाद चयनित गांवों में प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। यह विलेज वॉलेंटरी प्रोटेक्शन फोर्स वन विभाग और ग्रामीणों के बीच पुल का काम करेगी।
गांवों से कम से दो या तीन युवाओं को इस फोर्स में शामिल किया जाएगा और प्रभागीय वन अधिकारी इन युवाओं का चयन करेंगे। मानव वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित, वन्यजीवों की बहुलता, सोलर लाइट, फेंसिंग आदि का काम गांवों को इसमें शामिल किया जाएगा।
गांव में मानव वन्यजीव संघर्ष के जोखिम का आकलन, पूर्व चेतावनी की व्यवस्था का रखरखाव, गांव के लोगों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करना आदि काम यह फोर्स करेगी। वन विभाग इनसे फायर वाचर आदि का काम लेगा और इसके लिए इन्हें मानदेय भी देखा।
इन युवाओं को पहचान पत्र जारी करने और प्रशिक्षण देने का निर्देश भी दिया गया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक राजीव भरतरी के मुताबिक विलेज प्रोटेक्शन फोर्स के गठन का निर्णय 31 अगस्त को राज्य वन्यजीव बोर्ड की बैठक में लिया गया था।