पॉक्सो एक्ट के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार इस जघन्य अपराध के लिए अधिकतम सजा उम्रकैद है, जबकि न्यूनतम सजा सात साल की जेल है। दिसंबर-2012 के निर्भया मामले के बाद कानूनों में संशोधन किए गए थे। इसमें बलात्कार के बाद महिला की मृत्यु हो जाने या उसके मृतप्राय होने के मामले में एक अध्यादेश के माध्यम से मौत की सजा का प्रावधान शामिल किया गया जो बाद में आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम बन गया।
राहुल गांधी ने भी खींचा था ध्यान
नाबालिगों से बलात्कार की बढ़ती घटनाओं को लेकर कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी ट्वीट करके देश का ध्यान इस ओर खींचा था। राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में कहा था कि सिर्फ 2016 में ही देश में नाबालिग बच्चियों के साथ बलात्कार के 19,675 मामले सामने आए। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री को इन मामलों में तेजी से सुनवाई करके पीड़ितों को न्याय दिलाने का उपाय करना चाहिए।
पंजाब सरकार ने 12 वर्षों से कम आयु की बच्ची के साथ दुराचार पर मौत की सजा के अलावा यह क्रिमिनल लॉ (अमेडमेंट) आर्डिनेंस, 2018 आईपीसी में भी संशोधन किया है, जिससे तहत दुराचार के लिए कम से कम सजा सात साल से बढ़ाकर दस साल की गई है। 16 साल से कम आयु की लड़की के साथ दुराचार पर कम से कम सजा उम्र कैद निर्धारित की गई है, जोकि पहले 20 वर्ष बा-मशक्कत कैद थी।
इसके अलावा कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसीजर में भी संशोधन किया गया, जिससे दुराचार के मामलों में जांच दो महीने में पूरी करनी होगी। दुराचार के मामलों पर सुनवाई दो महीनों में मुकम्मल करनी जरूरी होगी और अपीलों के निपटारे के लिए छह महीनों का समय तय किया गया है। 12 और 16 वर्ष से कम आयु की लड़कियों के साथ दुराचार या सामूहिक दुराचार के मामलों में नामजद अपराधियों के लिए अग्रिम जमानत संबंधी कानून में भी पंजाब सरकार ने संशोधन किया है।
तराई इलाकों के अलावा पर्वतीय जनपदों में भी बच्चियों के साथ बलात्कार के मामले सामने आ रहे हैं। राज्य सरकार इन्हें लेकर चिंतित है। ऐसे में सरकार बारह वर्ष से कम उम्र की बच्चियों के साथ होने वाली रेप की घटनाओं में फांसी की सजा मुकम्मल कराने के लिए प्रावधान करेगी। अगले विधानसभा सत्र में इस बाबत विधेयक पेश पास जाएगा।
- त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री (उत्तराखंड)