अन्य राज्यों की तरह ही उत्तराखंड ने भी केंद्र से कहा है कि 2022 के बाद अगले तीन साल तक जीएसटी में कमी की भरपाई की व्यवस्था को जारी रखे। यह मांग 15वें वित्त आयोग से की गई है। वित्त विभाग के मुताबिक अगर यह मांग नहीं मानी जाती तो राज्य के पास अपने स्रोतों से भरपाई करने के अलावा और कोई चारा नहीं है। अनुमान है कि 2025 में हालात बदल जाएंगे।
नई सरकार के सामने होगी मुश्किल
राज्य में विधानसभा के चुनाव वर्ष 2022 में होंगे। ऐसे में नई सरकार को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकाराें को या तो अपने संसाधन बढ़ाने होंगे या फिर जीएसटी का कर संग्रह बढ़ाना होगा। यह नहीं हुआ तो विकास योजनाओं के लिए पैसे की कमी हो जाएगी।
2025 तक सुधर जाएंगे हालात
हमने 15वें वित्त आयोग से कहा है कि जीएसटी क्षतिपूर्ति 2025 तक बढ़ा दी जाए। जीएसटी के दो हिस्से हैं। एक केंद्र और दूसरा राज्य। राज्य में वस्तुओं के उपभोग (एसजीएसटी) की विकास दर 25 प्रतिशत है। सीजीएसटी या राज्य से बाहर जा रहे टैक्स की वृद्धि दर कम है। 2025 तक यह दोनों बराबर हो जाएंगी। इससे हमें 2025 के बाद जीएसटी के कारण नुकसान नहीं होगा।
-अमित नेगी, सचिव वित्त, उत्तराखंड