प्रदेश की भाजपा सरकार के विजन के अनुरूप अगर कार्य हुआ तो उत्तराखंड में पुलिस महकमे का कायाकल्प हो जाएगा। पुलिस मुख्यालय ने शासन की मंशा के अनुरूप जो प्लान तैयार किया है, उसमें कम से कम 100 करोड़ रुपये खर्च आने का अनुमान है। इसमें सभी 13 जिलों के थानों, कंट्रोल रूम, भवनों और आवासीय सुविधा के अलावा पुलिस व एसडीआरएफ में करीब 1200 पदों पर भर्तियां प्रस्तावित हैं।
प्र्रदेश में भाजपा के सत्तासीन होने के साथ ही विजन डॉक्यूमेंट के अनुरूप पुलिस के आधुनिकीकरण का प्रस्ताव मांगा गया था। पुलिस मुख्यालय ने काफी माथापच्ची के बाद यह महत्वाकांक्षी प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है। निसंदेह यह प्लान अगर कारगर हुआ तो पुलिस थानों की दशा और दिशा दोनों बदल जाएगी। देहरादून और हरिद्वार में तो स्थिति थोड़ा संतोषजनक है, लेकिन प्रदेश के अन्य जिलों में थानों और कंट्रोल रूम की स्थिति अच्छी नहीं है।
प्रस्ताव में थानों और कंट्रोल रूम के आधुनिकीकरण पर फोकस किया गया है। थानों के भवनों के अलावा पीड़ितों को सुविधा दिया जाना प्रस्तावित है। प्रदेश में अभी सिर्फ 18 प्रतिशत पुलिसकर्मियों को ही आवासीय सुविधा मिलती है, जिसे 33 प्रतिशत करने को कहा गया है।
सूत्रों की मानें तो थानों और भवनों के रखरखाव पर अब तक डेढ़ करोड़ मिलते हैं, जिसे बढ़ाकर पांच करोड़ करने का प्रस्ताव है। पुलिस विभाग और एसडीआरएफ में 1200 पदों पर नई भर्ती की जानी है, जो काफी समय से रिक्त है। इनमें कांस्टेबलों की संख्या सबसे ज्यादा है। खासतौर से पुलिसकर्मियों के प्रशिक्षण को प्रस्ताव का हिस्सा बनाया गया है। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि पुलिस के इस प्लान पर भाजपा की प्रचंड बहुमत की प्रदेश सरकार कितना मेहरबान होती है।
प्रदेश की भाजपा सरकार के विजन के अनुरूप पुलिस थानों और कंट्रोल रूम के आधुनिकीकरण का प्रस्ताव तैयार कर भेज दिया गया है। नई भर्तियों के अलावा पुलिस प्रशिक्षण को खास जोर दिया गया है।
- अशोक कुमार, अपर पुलिस महानिदेशक प्रशासन