हर महीने बढ़ेगा पांच सौ करोड़ खर्च
वर्तमान में प्रदेश सरकार में 1.60 लाख नियमित कर्मचारी हैं। इनके वेतन पर सरकार सालाना 17,185 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। सरकारी सहायता से चल रहे संस्थानों के कर्मचारियों पर सरकार 1,309 करोड़ और आउटसोर्स कर्मियों पर 1,091 करोड़ सालाना खर्च हो रहा है। कई विभागों व संस्थानों में 40 से 50 हजार अस्थायी कर्मचारी हैं। कोर्ट का फैसला लागू होता है तो सरकार पर इन सभी अस्थायी कर्मचारियों के लिए करीब 6,000 करोड़ रुपये का इंतजाम करना पड़ेगा। नियमित होने पर कर्मचारियों के एरियर भुगतान का दबाव अलग बनेगा। इन्हीं आशंकाओं के कारण सरकार हिचक रही है।
सालों से लड़ी जा रही है अदालत में लड़ाई
उपनल और अन्य माध्यमों से कई विभागों में अस्थायी नौकरी कर रहे कर्मचारी कई वर्षों से अदालतों में जंग लड़ रहे है। जिन पदों पर वे काम कर रहे, उन पर उन्हें उसकी तुलना में बहुत कम वेतन मिल रहा है। वे चाहते हैं सरकार उन्हें जब तक नियमित नहीं करती, उन्हें समान कार्य का समान वेतन दे।