आखिर उत्तराखंड सरकार को यह मानना पड़ा कि जिला और क्षेत्र पंचायतों को खुश करने की कोशिश में तीसरे वित्त आयोग की संस्तुतियों को भी दरकिनार करने में परहेज नहीं किया गया।
शनिवार को देर शाम मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बाकायदा वित्त अफसरों के अफसरों को बुलाकर पहले जैसी व्यवस्था का निर्देश दिया। वित्त विभाग की ओर से नवंबर को आदेश जारी कर ग्राम पंचायतों को तीसरे वित्त आयोग की संस्तुति पर मिल रही किस्त को जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत में डायवर्ट कर दिया गया था।
तर्क यह दिया गया था कि केंद्र सरकार ने जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायतों का बजट शून्य कर दिया है और सारा पैसा ग्राम पंचायतों को दे दिया है।
वित्त विभाग के इस आदेश को ग्राम प्रधानों ने पंचायतों के खिलाफ नाइंसाफी माना था। इसको लेकर ग्राम प्रधान बाकायदा धरना-प्रदर्शन पर भी उतर आए थे। हैरान करनेवाली बात यह भी रही कि वित्त के इस आदेश से खुद मुख्यमंत्री हरीश रावत और पंचायत मंत्री प्रीतम सिंह साफ इनकार कर गए थे।
दूसरी तरफ, विशेषज्ञों का साफ कहना था कि तीसरे वित्त आयोग की संस्तुति मार्च 2016 तक के लिए लागू हैं और बिना कैबिनेट की मंजूरी के इन संस्तुतियों को दरकिनार नहीं किया जा सकता है।
शनिवार को मामले के गरमा जाने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वित्त विभाग के अधिकारियों को भी बुलावा भेजा और इस आदेश को वापस लेने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार के मुताबिक मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि यह आदेश तुरंत वापस किया जाए।
इस आदेश के वापस होने पर अब प्रदेश सरकार को जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के लिए भी धन की व्यवस्था करनी होगी। मुख्यमंत्री का कहना है कि पंचायतों को प्रदेश में और अधिक मजबूत करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी।