नामांकन में गिरावट और पहाड़ी क्षेत्रों की विशेष समस्या
शोधपत्र में उल्लेख किया गया है कि राज्य में कई प्राथमिक विद्यालय शून्य नामांकन की स्थिति तक पहुंच चुके हैं। वहीं, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में कुल छात्र संख्या औसतन 40–50 रह गई है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अभाव और बेहतर अवसरों की तलाश में अभिभावक निजी विद्यालयों एवं मैदानी क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।
स्कूल कॉम्प्लेक्स : नीति की भावना और व्यावहारिक अंतर
शोध पत्र में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति में स्कूल कॉम्प्लेक्स की अवधारणा सहयोग, संसाधन साझाकरण और सामूहिक शैक्षिक योजना पर आधारित है, लेकिन उत्तराखंड में इसे विद्यालयों के समायोजन के रूप में अपनाया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों की स्कूल तक पहुंच कठिन हो रही है।
शैक्षिक गिरावट की कुछ प्रमुख वजह
-कमजोर प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मक क्षमता
-विषय–विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी (ऊपरी कक्षाओं में भी और प्राथमिक स्तर पर भी)
-प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और डिजिटल साधनों का अभाव
-स्थानीय भाषा और विद्यालयी भाषा के बीच अंतर
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शोधपत्र में सुझाए गए समाधान
-सीखने के परिणामों को केंद्र में रखकर शिक्षा की पुनर्रचना
– पठन–लेखन और गणितीय क्षमता को प्रारम्भिक कक्षाओं में प्राथमिकता देना
-स्कूल कॉम्प्लेक्स का नीति–अनुरूप क्रियान्वयन
– विद्यालय विलय रोककर साझा प्रयोगशालाएँ, पुस्तकालय और संसाधन केंद्र स्थापित करना।
-कक्षावार–विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति (विशेषकर प्रारंभिक स्तर पर)
– पर्वतीय क्षेत्रों के लिए विशेष प्रोत्साहन एवं स्पष्ट नीति