अपर निदेशक बेसिक शिक्षा वीरेंद्र सिंह रावत के मुताबिक पूर्व में छात्रों को पाठ्य पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराने के संबंध में आदेश जारी हुआ था। जबकि बाद में निर्णय लिया गया कि छात्रों को पाठ्य पुस्तकों के बजाए डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से धनराशि दी जाए।
अपर निदेशक के मुताबिक जिलों को इसके लिए काफी समय पहले धनराशि भेज दी गई थी। इसके बाद भी बच्चों के खातों में धनराशि दिए जाने में देरी हुई है।
इसी साल फरवरी महीने में 1625 लाख से अधिक की धनराशि जिलों को भेज दी गई है। जिसमें अल्मोड़ा को 112 लाख, बागेश्वर को 57 लाख, चमोली को 79 लाख, चंपावत को 53 लाख, देहरादून को 180 लाख, हरिद्वार को 294 लाख, नैनीताल को 144 लाख, पौड़ी को 106 लाख, पिथौरागढ़ को 83 लाख, रुद्रप्रयाग को 52 लाख, टिहरी को 119 लाख, यूएस नगर को 272 लाख एवं उत्तरकाशी को 70 लाख से अधिक की धनराशि जारी की गई थी। लेकिन लचर सिस्टम के चलते कुछ जिलों में अब भी बच्चों के हाथों में पुस्तकों के लिए धनराशि नहीं पहुंच पायी है।
समग्र शिक्षा अभियान की ओर से काफी पहले जिलों को पुस्तकों के लिए धनराशि भेज दी गई थी, लेकिन बच्चों को पुस्तकें दी जाएं या फिर इसके लिए धनराशि इसे लेकर कुछ समय तक असमंजस बना रहा। यही वजह रही कि इसमें देरी हुई है।
-वीएस रावत, अपर निदेशक बेसिक शिक्षा