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पीडीएफ के हाथ है उत्तराखंड सरकार की चाबी

Fri, 21 Mar 2014 11:27 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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सांसद सतपाल महाराज के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद प्रदेश सरकार पर संकट के बादल घिर गए हैं। अभी तक संकटमोचक की भूमिका में रहे पीडीएफ के नए राजनीतिक समीकरणों में बदले तेवर सीएम हरीश रावत की दिक्कतें बढ़ा सकते हैं।
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पीडीएफ के नेता मंत्री प्रसाद नैथानी की महाराज से करीबी सरकार के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन सकती है। नैथानी ने महाराज के फैसले का समर्थन कर अपनी मंशा तो साफ भी कर दी है।

हालांकि पीडीएफ में अंदरखाने कई मतभेद हैं जिनका फायदा कांग्रेस विपरीत परिस्थितियों में उठा सकती है। बहुमत से दो सीट दूर कांग्रेस को पीडीएफ के सात विधायकों का साथ है, जबकि भाजपा को सरकार बनाने के लिए 6 विधायकों की जरूरत है। ऐसे में भाजपा को समूचे पीडीएफ का साथ चाहिए।
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पीडीएफ का फिलहाल यह दावा है कि जल्द उसके सातों विधायक एक साथ बैठक संयुक्त फैसला लेंगे।

वेट एंड वाच की स्थिति में पीडीएफ

महाराज के इस्तीफे से मची राजनीतिक उथल पुथल के बाद महाराज के करीबी पीडीएफ नेता मंत्री प्रसाद नैथानी के आवास पर हुई बैठक में फिलहाल वेट एंड वाच की स्थिति बनाए रखने पर फैसला हुआ है।

पीडीएफ के सात विधायकों से बसपा से कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश, उक्रांद से कैबिनेट मंत्री प्रीतम पंवार शुक्रवार को कैबिनेट मंत्री प्रीतम पंवार के घर पर पहुंचे।

बसपा नेता विधायक दल हरिदास शहर से बाहर हैं जबकि विधायक सरबत करीम अंसारी हज पर गए हैं। कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल, विधायक दिनेश धनै किन्हीं कारणों से राज्य से बाहर थे।

बैठक में तीन नेताओं ने नए राजनीतिक समीकरणों पर विचार कर दूरभाष पर अन्य सहयोगियों से वार्ता की है। पीडीएफ के सभी सदस्यों के लौटने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

आसान नहीं होगा सरकार से अलग होना

कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थामना पीडीएफ के लिए आसान नहीं रहेगा। नैथानी की महाराज के साथ आस्थाएं जुड़ी हैं और फ्रंट में उनकी स्थिति मजबूत है। ऐसे में कांग्रेस के लिए नैथानी को साथ रखना सबसे कठिन है।

उधर, आपसी मतभेदों से दो खेमों में बंटे बसपा के तीन विधायक कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा हैं। बसपा से निलंबित सुरेंद्र राकेश और हरीदास की पटरी विधायक सरबत करीम के साथ नहीं बैठ रही है।

विधायक दिनैश धनै आकांक्षाएं मंत्री पद से जुड़ी हैं। हरीश दुर्गापाल की आस्थाएं कांग्रेस के साथ रही हैं, जबकि उक्रांद के प्रीतम पंवार फ्रंट के साथ रहेंगे।

लोकसभा चुनाव तक का इंतजार
लोकसभा चुनाव तक मामला शांत रहने की संभावना है। चुनाव तक भाजपा खुद भी तोड़फोड़ और गठजोड़ के आरोपों से बचने की कोशिश करेगी। सतपाल महाराज भी इसका इशारा कर चुके हैं। अगर लोकसभा चुनाव तक मामला शांत रहता है तो कांग्रेस को आपदा प्रबंधन का समय मिल जाएगा। दो विधायक भी कांग्रसे की जरूरत को पूरा कर सकते हैं।
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बयानों से डराते रहे पीडीएफ नेता

कांग्रेस में सांसद सतपाल महाराज की लगातार उपेक्षा हो रही थी, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है, जिसका खामियाजा कांग्रेस को उठाना पड़ेगा। अभी हमारे कुछ सहयोगी बाहर हैं जिससे पीडीएफ अभी वेट एंड वाच की स्थिति में हैं
-कैबिनेट मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी, नेता पीडीएफ

सतपाल महाराज के कांग्रेस छोड़ने से पैदा हुए हालात पर पीडीएफ नजर रखे हुए है। इससे भाजपा और कांग्रेस में जो भी स्थितियों पैदा होंगी उनको ध्यान में रखकर पीडीएफ सदस्यों की सर्वसम्मति से कोई भी निर्णय लिया जा सकता है।
-कैबिनेट मंत्री प्रीतम पंवार, नेता पीडीएफ

पीडीएफ के सभी साथी सदस्य फिलहाल मौजूद नहीं है। सभी के पहुंचने के बाद इस राजनीतिक स्थिति पर विचार विमर्श किया जाएगा। अभी इस इस मसले पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।
-कैबिनेट मंत्री सुरेंद्र राकेश, नेता पीडीएफ
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