उत्तराखंड में महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग के अंतर्गत बाल गृह, नारी निकेतन, बालिका निकेतन, शिशु गृह आदि में ऐसे करीब एक हजार बच्चें हैं, जिनके परिवार के बारे में कोई सूचना नहीं है।
इन्हें राजकीय सेवाओं का कोई लाभ भी नहीं मिल पा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने भी कुछ समय पहले ऐसे बच्चों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकारों से अपेक्षा की है कि वे उनके लिए राजकीय सेवाओं में आरक्षण की व्यवस्था करेंगे।
महाराष्ट्र सरकार ने कुछ समय पहले ऐसे बच्चों के लिए एक फीसदी आरक्षण की व्यवस्था कर दी है। त्रिवेंद्र कैबिनेट ने भी बुधवार को इस संबंध में लाए गए प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने इसकी जानकारी दी।