बेमौसम बारिश से भले ही उत्तराखंड में गेहूं की फसल को 73 फीसदी नुकसान हुआ है, लेकिन उन 12 हजार किसानों को इससे परेशान होने की जरूरत नहीं जिनकी फसलें बीमित हैं।
संयुक्त निदेशक कृषि डॉ. अजय शर्मा के मुताबिक बगैर किसी प्रार्थना पत्र के उन प्रभावित किसानों के खातों में क्लेम जमा होगा। फसली बीमा के लिए प्रदेश में दो तरह की फसल बीमा योजनाएं चल रही हैं। सेब, आम, लीची, आलू और टमाटर की फसलें मौसम आधारित फसल बीमा योजना एवं धान, गेहूं और मंडुआ संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना के अंतर्गत आती हैं।
केंद्र की एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया द्वारा चलाई जा रही इन योजनाओं के लिए मामूली प्रीमियम पर किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाती है। बीमा कंपनी के रवि पांडे के मुताबिक इसके लिए अलग-अलग जिलों में अलग-अलग प्रीमियम लिया जाता है।
किसानों द्वारा बैंक से प्रति हेक्टेयर लिए गए ऋण पर प्रीमियम काट लिया जाता है। जिसके हिसाब से किसानों को क्षतिपूर्ति दी जाती है। संयुक्त कृषि निदेशक डॉ. अजय शर्मा बताते हैं कि क्लेम के लिए बीमित किसान को प्रार्थना पत्र देने की जरूरत नहीं है। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर यह सीधे किसानों के खातों में जमा किया जाएगा। इस साल 12 हजार से अधिक किसानों ने फसलों का बीमा करवाया हुआ है।
ऐसे तो राहत राशि से छूट जाएंगे किसान
राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही किसानों पर भारी पड़ने जा रही है, विभाग की ओर से खेतों में जाकर सर्वे करने के बजाए अनुमान लगाकर बेमौसम बारिश से प्रभावित फसलों की जानकारी दी जा रही है। जिससे कई प्रभावित किसानों के राहत राशि पाने से छूटने का अंदेशा बना है।
लेखपाल गुरुवार को बाटेंगे मुआवजे के चेक
ओलावृष्टि और बारिश से प्रभावित किसानों की सूची मिलने के बाद तहसील सदर में बुधवार को दो गांवों के 95 किसानों के चेक काटे गए। इनकी कुल धनराशि 1 लाख 44 हजार रुपए है। लेखपालों को मुआवजे के चेक दे दिए गए हैं। इन्हें बृहस्पतिवार से वितरित किया जाएगा। एसडीएम सदर रामजी शरण शर्मा का कहना है कि तीन-चार दिन में मुआवजे के सभी चेक बांट दिए जाएंगे।
तहसीलदार मनवर सिंह कंडारी ने बताया कि उन्हें किसानों की सूची मंगलवार को मिली थी। चेक काटकर लेखपालों को दिए जा रहे हैं। लेखपाल क्षेत्र में जाकर इन्हें वितरित कर देंगे। उन्होंने बताया कि तहसील सदर ने पहले ही सर्वे करा लिया था। इसकी सूची प्रशासन को भेज दी गई थी। उसी आधार पर चेक काटने का कार्य किया जा रहा है।
इतनी जल्दी कैसे हो गया सर्वे?
डीएम रविनाथ रमन ने तीन दिन पहले एसडीएम और तहसीलदार की बैठक में बारिश और ओलावृष्टि से फसलों की सर्वे रिपोर्ट न दिए जाने पर नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने हफ्ते भर में सर्वे रिपोर्ट देने की चेतावनी भी दी थी।
अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि डीएम के सख्त होने के बाद अचानक तहसीलों ने सर्वे रिपोर्ट कहां से दे दी? क्या सर्वे वास्तविक है या काल्पनिक? लोगों ने इस बाबत प्रशासन से जवाब मांगना शुरू कर दिया है।
खेत में गए नहीं, मुआवजा तय कर दिया
देहरादून में तहसील वाले मुआवजा देने में फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। खेतों में स्थिति देखे बिना ही जल्दबाजी में मुआवजे की रकम तय की जा रही है। भाजपाइयों ने इन आरोपों के साथ तहसील की सर्वे रिपोर्ट पर प्रश्न चिन्ह लगाया और डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया। फिर एडीएम वित्त को घेरा।
एडीएम को उन गांवों की सूची दी, जहां गए बिना ही कर्मचारियों ने सर्वे रिपोर्ट बना दी। एडीएम ने एसडीएम को जांच के आदेश किए हैं। भाजपाइयों ने एडीएम वित्त प्रताप सिंह शाह को 10 गांवों की सूची दी और बताया कि इन गांवों में तहसील का कोई कर्मचारी नहीं गया।
तहसील वालों ने बिना मौके पर गए घर में बैठकर रिपोर्ट तैयार कर दी है। इन गांवों में हरभजवाला, मेहूंवाला, निरंजनपुर, सेवलां खुर्द, मोहब्बेवाला, भारूवाला, ब्राह्मणवाला, मोथरोवाला, बंजारावाला, चंद्रबनी आदि गांव शामिल हैं।
लोगों ने भाजपा नेता प्रकाश सुमन ध्यानी, शादाब शम्स, विरेंद्र सजवाण, शौकीन अंसारी के साथ एडीएम को ज्ञापन दिया। एडीएम वित्त शाह ने भाजपा नेताओं को मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया।
इसके बाद एसडीएम रामजी शरण शर्मा को जांच के आदेश किए। एडीएम ने कहा कि तहसील कर्मी मौके पर जाएं और जिसके खेत का सर्वे करें उनसे भी मिलें जिससे लोग आश्वस्त रहें कि उनके खेत का सर्वे हुआ है।