प्रदेश की भाजपा सरकार का पहले दिन से ही आर्थिक संसाधनों में बढ़ोत्तरी करने पर जोर है, लेकिन आय बढ़ाने की उसकी कोशिशें असर नहीं दिखा रही है। जिस उम्मीद से सरकार ने विभिन्न करों व शुल्क वसूली के नए लक्ष्य तय किए थे, उसे नोटबंदी और जीएसटी से बड़ा धक्का लगा है।
रही-सही कसर केंद्र सरकार के ही रियल एस्टेट अधिनियम ने पूरी कर दी है। रियल एस्टेट प्राधिकरण के कड़े मानकों का जमीनों के कारोबार पर असर दिखाई दे रहा है। पिछले पांच महीनों के दौरान कमाई के जो आंकड़े सरकार को प्राप्त हुए हैं, उससे सरकार की पेशानी पर बल है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो आय के आंकड़ों का यही रुझान रहा तो करों से होने वाली आय पिछले वित्तीय वर्ष के आंकड़े को मुश्किल से छू पाएगी।
प्रदेश सरकार ने इस वित्तीय वर्ष में करों से 15057 करोड़ रुपये का लक्ष्य तय किया है। वित्तीय वर्ष 2014-15 में सरकार ने इस मद में करीब 14500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त किया था। पिछले वित्तीय वर्ष के दौरान भी सरकार ने 15000 करोड़ रुपये के आंकड़े को नहीं छूआ था।
आय के इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वित्त मंत्री प्रकाश पंत लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। मगर इन बैठकों में इनकम के जो रुझान आ रहे हैं, वह उत्साहित करने वाले नहीं हैं। सरकार को स्टांप और रजिस्ट्रेशन, आबकारी, जीएसटी, परिवहन, वन और खनन से हुई कम आय से झटका लगा है।
स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन शुल्क की आय में 11 फीसदी की कमी है, जबकि आबकारी से होने वाली आय का आंकड़ा भी छह फीसदी कम है। सरकार की सबसे कठिन परीक्षा जीएसटी ले रहा है। जीएसटी से सरकार को अप्रैल से जुलाई महीने तक 2016.77 करोड़ रुपये की आय हो पाई, जबकि इसी अवधि में पिछले साल बिक्री कर से सरकार को 2244.60 करोड़ रुपये की आय हुई थी। पिछले जुलाई तक शराब की बिक्री से सरकार822.27 करोड़ रुपये कमाए थे, लेकिन इस साल इस अवधि तक आय का आंकड़ा 772.68 करोड़ रुपये का है।
आश्वस्त हैं वित्त मंत्री
वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक सरकार करों से होने वाली आय के लक्ष्य को पूरा कर लेगी। उनकी मानें तो सरकार की आय पर नोटबंदी और जीएसटी का कोई खास असर नहीं है। उनके मुताबिक, जीएसटी लागू करने में शुरुआती कठिनाइयों के बीच इसके बेहद सकारात्मक नतीजों को लेकर सरकार आश्वस्त है।
रेरा से भी झटका
प्रदेश में रियल इस्टेट नियामक अधिनियम लागू होने के बाद से जमीनों के कारोबार पर असर पड़ा है। कानून के तहत 500 वर्ग मीटर भूखंड से अधिक की भूमि का सौदा करने के लिए कारोबारी को अपना रजिस्ट्रेशन कराना होगा। नोटबंदी के बाद से मंद पड़े जमीनों के कारोबार और ज्यादा ठंडा पड़ गया है। इसका सीधा असर सरकार को स्टाम्प शुल्क के एवज में होने वाली आय पर पड़ा है।