हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को तीन माह के भीतर गंगा प्रबंधन बोर्ड और इसी तर्ज पर ही यमुना प्रबंधन बोर्ड गठित करने का भी आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि गंगा मैनेजमेंट बोर्ड न होने से गंगा के पानी के बंटवारे को लेकर दुविधा है। इस वजह से उत्तराखंड के किसानों को इसका लाभ नहीं रहा है।
यमुना नदी के जल के संबंध में नीति बनाई जानी चाहिए। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों के बंटवारे के मामले पर भी सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने साफ कहा कि राज्य सरकारों की शिथिलता के कारण उत्तराखंड के लोगों को विपरीत परिणामों का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट ने परिसंपत्तियों का बंटवारा करने, अतिक्रमणकारियों को भी हटाने का आदेश दिया और कहा कि आदेश का पालन न होने पर संबंधित अधिकारी उत्तरदायी माने जाएंगे।
वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ढकरानी देहरादून निवासी मौ. सलीम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि शक्ति नहर डाक पत्थर ढकरानी, ढालीपुर एवं कुलहाल स्थित सिंचाई विभाग उत्तराखंड की संपत्तियों में लोगों ने अवैध कब्जा किया हुआ है।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच परिसंपत्तियों का बंटवारा न होने से उत्तराखंड में यूपी के स्वामित्व वाली परिसंपत्तियों पर कब्जे हो रहे हैं। उत्तराखंड सरकार ने बताया कि अतिक्रमण को लेकर सिविल न्यायालय में भूमि स्वामित्व का वाद दायर है। शासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जा रही है। परिसंपत्तियों के संबंध में केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश के बीच बात हो रही है। अतिक्रमणकारियों का कहना था कि उनका भूमि पर स्वामित्व है और इसका फैसला सिविल न्यायालय को करना है। कोर्ट ने 10 नवंबर को इस मामले में निर्णय सुरक्षित रख लिया था।
सोमवार को कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि 16 साल के उपरांत भी परिसंपत्तियों का बंटवारा न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। केंद्र व राज्य सरकारों की शिथिलता के कारण उत्तराखंड राज्य के निवासियों को विपरीत परिणाम भुगतना पड़ रहा है। कोर्ट ने परिसंपत्तियों का बंटवारा करने व तीन माह के भीतर गंगा प्रबंधन बोर्ड और इसी तर्ज पर यमुना के लिए भी प्रबंध करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि दोनों बोर्ड में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व भी रहेगा। हाईकोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को चिह्नित कर उसे हटाने के निर्देश दिए और कहा कि आदेश का पालन न होने पर संबंधित अधिकारी उत्तरदायी माने जाएंगे।