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झटका: उत्तराखंड सरकार ने सभी संवर्गों के प्रमोशन पर लगाई रोक, पीछे है ये वजह

Thu, 12 Sep 2019 08:52 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

- अगले आदेश तक डीपीसी की बैठकों को  किया स्थगित
- प्रमोशन में आरक्षण पर न्यायालय अंतिम निर्णय आने तक रहेगी रोक
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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प्रदेश सरकार ने राज्याधीन सेवाओं, शिक्षण संस्थाओं, सार्वजनिक उद्यमों, निगमों व स्वायत्तशासी संस्थाओं में सभी संवर्गों के लोकसेवकों के प्रमोशन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। सरकार ने यह कदम हाल ही में उच्च न्यायालय से पदोन्नति में आरक्षण देने के संबंध में पारित आदेश और इस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका विचाराधीन होने के चलते उठाया है। न्यायालय से अंतिम आदेश आने व सरकार के स्तर पर कोई नीतिगत निर्णय लेने तक पदोन्नतियों पर रोक रहेगी। सभी विभागों को अगले आदेशों तक विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) बैठक स्थगित रखने को कहा गया है। ये आदेश मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने कार्मिक एवं सतर्कता विभाग की ओर से जारी किए हैं।

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मुख्य सचिव की ओर से सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, प्रभारी सचिव, सभी विभागध्यक्ष व कार्यालयाध्यक्ष को जारी पत्र में उच्च न्यायालय से ज्ञानचंद बनाम उत्तराखंड राज्य एवं अन्य में एक अप्रैल 2019 को पारित आदेश का उल्लेख किया गया है। इस आदेश में सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि वह अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति वर्ग के कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण दे। न्यायालय ने पांच सितंबर 2012 के उस आदेश को निरस्त कर दिया है, जिसमें पदोन्नति में आरक्षण पर रोक लगाई गई  है। पत्र में मुख्य सचिव ने कहा है कि पांच सितंबर 2012 का आदेश निरस्त होने के बाद 19 जुलाई 2012 का आदेश स्वयमेव प्रभावी हो गया है। इस आदेश के तहत डीपीसी की बैठक का आयोजन न करने और शासन के अग्रिम आदेशों तक पदोन्नति स्थगित रखे जाने का उल्लेख है। मुख्य सचिव ने कहा कि न्यायालय के फैसले के विरुद्ध राज्य सरकार की ओर से पुनर्विलोकन याचिका उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। इसलिए इन सभी पहलुओं के आलोक में राज्याधीन सेवा के समस्त संवर्गों की पदोन्नति संबंधी प्रक्रिया को अग्रिम आदेशों तक स्थगित रखा जाए।

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कर्मचारी मायूस, फेडरेशन के तेवर तल्ख

सरकार के इस फैसले से पदोन्नति की राह देख रहे सैकड़ों कर्मचारियों को झटका लगा है। डीपीसी की बैठकें आयोजित होने का इंतजार कर रहे कर्मचारियों में भी मायूसी पसर गई है। उधर, सरकार के इस कदम से उत्तराखंड जनरल ओबीसी इम्प्लाइज फेडरेशन ने असंतोष जाहिर किया है। फेडरेशन के अध्यक्ष दीपक जोशी ने कहा कि फेडरेशन सरकार के इस निर्णय से सहमत नहीं है और अब उसका आंदोलन और अधिक तेजी से चलेगा।

एससी एसटी कर्मचारी भी नाराज
कार्मिक सतर्कता विभाग के आदेश से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जाति वर्ग के कर्मचारियों में भी नाराजगी है। उच्च न्यायालय द्वारा पदोन्नति में आरक्षण बहाल करने का आदेश पारित होने के बाद वे प्रमोशन मिलने की आस लगाए बैठे थे। लेकिन शासन ने अदालत का अंतिम आदेश आने तक सभी पदोन्नतियों में रोक लगा दी है। एससी एसटी इम्प्लाइज फेडरेशन के नेताओं का कहना है कि अदालत द्वारा पांच सितंबर 2012 का आदेश निरस्त कर दिए जाने के बाद वर्ष 2006 का रोस्टर आदेश अस्तित्व में आ गया है, जिसमें एससी व एसटी वर्ग को पदोन्नति देने के आदेश हैं।
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