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उत्तराखंड-यूपी में बनी सहमति, प्रदेश को मिली 375 हेक्टेयर भूमि, 400 भवन 

Mon, 19 Aug 2019 08:41 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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- फोटो : फाइल फोटो
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परिसंपत्तियों के बंटवारे के तहत उत्तरप्रदेश ने उत्तराखंड को 375 हेक्टेयर भूमि देना स्वीकार कर लिया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की उत्तराखंड में स्थित इस भूमि के साथ ही उत्तर प्रदेश 400 भवन भी उत्तराखंड को देगा। उत्तर प्रदेश ने उत्तराखंड को नानक सागर बांध में जल क्रीड़ा के लिए भी अनुमति दे दी है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद की उत्तराखंड स्थित कालोनियों के प्रबंधन का अधिकार भी उत्तराखंड को देने पर यूपी सहमत हो गया है। 

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शनिवार को राजपुर रोड स्थित सिविल सर्विर्सेज इंस्टीट्यूट में हुई बैठक में उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय सहित दोनों राज्यों के प्रमुख सचिवों, सचिव स्तर तक के अधिकारियों की मैराथन बैठक में दोनों राज्यों के  बीच देनदारियों के सभी मामलों पर सहमति बनी।  दोनों राज्यों के बीच करीब एक साल बाद हुई बैठक के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आया। राज्य गठन के बाद से अब तक के सिंचाई विभाग के लंबित मामलों में दोनों राज्यों ने पहली बार सकारात्मक रुख दिखाया। सिंचाई विभाग के अलावा सबसे अधिक जटिल मुद्दा उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद का था। उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद के अधीन उत्तराखंड मेें देहरादून में तीन, रुद्रपुर और काशीपुर में कालोनियां हैं। 

बैठक में उत्तर प्रदेश ने इन कालोनियों के प्रबंधन का अधिकार उत्तराखंड को देने पर सहमति जताई। तय किया गया कि दोनों राज्यों एक संयुुक्त खाता बनाएंगे और कालोनियों से होने वाली आय को इस खाते में डाला जाएगा। आपसी सहमति के आधार पर इस खाते का संचालन होगा। उत्तर प्रदेश ने इन कालोनियों से संबंधित रिकार्ड 31 दिसंबर से पहले ही उत्तराखंड को हस्तांतरित करने पर सहमति जताई है। तय किया गया कि संयुक्त खाते से आवास विकास की देनदारी चुकाई जाएगी। अगर देनदारी ज्यादा हुई तो शेष भुगतान उत्तर प्रदेश करेगा।   
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इन मुद्दों पर बनी सहमति...
- सिंचाई विभाग की चंपावत और ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार में 400 हेक्टेयर भूमि है। 375 हेक्टेयर भूमि उत्तराखंड को हस्तांतरित होगी। शेष भूमि का परीक्षण के बाद निर्णय लिया जाएगा। इससे पूर्व संयुक्त सर्वेक्षण होगा।
- सिंचाई विभाग के 400 आवासीय भवन उत्तराखंड को मिलेंगे। ये भवन हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में हैं।
- टिहरी बांध में सिंचाई के लिए 665 क्यूसेक पानी पर भी सहमति बनी। पहले फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार होगी। इसके बाद केंद्रीय जल आयोग के माध्यम से इस पर निर्णय लिया जाएगा।
- नानक सागर जलाशय पर जलक्रीड़ा संचालित करने को उत्तर प्रदेश ने उत्तराखंड को अनुमति दी। दो अन्य जलाशयों पर सुरक्षा के कारण अभी सहमति नहीं बन पाई है
- किच्छा में सिंचाई विभाग की भूमि पर बने बस अड्डे को उत्तराखंड को हस्तांतरित करने पर सहमति बन गई है।
- ऊपरी गंगनहर से 20 किमी लंबा स्ट्रैच जल क्रीड़ा संचालित करने के लिए उत्तराखंड ने मांगा था, जिस पर सहमति बन गई है।

पीपीएफ के 174 करोड़ का मसला सुलझा
दोनों राज्यों के बीच एक बड़ा मसला ऊर्जा विभाग के कर्मचारियों के पीपीएफ के 174 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का था। यूपी यह बकाया भुगतान करने पर सहमत हो गया है। इसकी एवज में उत्तराखंड को उस समय का बकाया 162 करोड़ रुपये के बकाए बिजली बिल का भुगतान करना होगा।

एक साल पहले हुई बैठक में इन मसलों पर बनी थी सहमति
29 जून 2018 को लखनऊ स्थित सचिवालय एनेक्सी में उत्तराखंड के मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह और उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्य सचिव राजीव कुमार के बीच परिसंपत्तियों और आस्तियों के बंटवारे को लेकर कई मामलों पर सहमति बनी थी। बैठक में तय हुआ था कि यूपी सिंचाई अभिकरण 3.98 करोड़ रुपये उत्तराखंड के मत्स्य विभाग को देगा। यूपी वन निगम ने उत्तराखंड वन निगम को पहले चरण में 99 करोड़ रुपये देने पर सहमति दी थी। यूपी परिवहन निगम ने उत्तराखंड परिवहन को 8.27 करोड़ रुपये देना तय किया था। यूपी ऊर्जा विभाग की ओर से उत्तराखंड ऊर्जा विभाग के कर्मियों के पीपीएफ का 174 करोड़ रुपये वास्तविक भुगतान करना, उत्तराखंड की ओर से उत्तर प्रदेश को 160 करोड़ रुपये बिजली बिल का भुगतान करना, उत्तराखंड की सीमा में स्थित यूपी के अधीन सिंचाई विभाग की जमीन का 25 प्रतिशत उत्तराखंड को दिया जाना तय किया गया था।

बैठक बेहद सकारात्मक रही। अधिकांश मामलों पर दोनों राज्यों के बीच सहमति बन गई है। कुछ मसलों के निस्तारण के लिए दोनों राज्य अपने स्तर पर कैबिनेट में प्रस्ताव लाएंगे। धीरे-धीरे परिसंपत्तियों के सभी मसले हल कर दिए जाएंगे।
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-उत्पल कुमार सिंह, मुख्य सचिव, उत्तराखंड शासन
 

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