उत्तराखंड के चंपावत दूरस्थ भिंगराड़ा राजकीय इंटर कॉलेज की छात्रा प्रीति भट्ट जापान के तकनीकी हुनर से अचंभित हैं। दिल्ली से 5834 किमी दूर टोक्यो का एक सप्ताह का दौरा कर शुक्रवार को दिल्ली पहुंचीं प्रीति को 634 मीटर ऊंचे टोक्यो स्काई ट्री की तकनीक ने हैरान कर दिया। दिल्ली से फोन पर प्रीति भट्ट ने अमर उजाला से अपने अनुभव साझा किए। जापान की साइंस एंड टेक्नोलॉजी संस्था ने उन्हें प्रमाणपत्र दिया।
प्रीति कहती हैं कि जापान के स्कूलों की छोटी कक्षा के छात्रों का हुनर अपनी उम्र से ज्यादा है। वहां पढ़ाई से ज्यादा जोर प्रैक्टीकल एजुकेशन पर दिया जाता है और यही इस देश की सबसे बड़ी तकनीकी ताकत है। प्रीति बताती हैं कि टोक्यो के एक स्कूल के भ्रमण में उन्होंने सातवीं कक्षा के छात्र फूजी को घड़ी का निर्माण करते देखा। इसी तरह के तकनीकी प्रैक्टीकल दूसरे छात्र-छात्राएं भी करते मिले। रोबोट का उपयोग आम जापानी नागरिक की जिंदगी का हिस्सा है।
जापान-एशिया यूथ एक्सचेंज प्रोग्राम (सकोरा साइंस प्लान) के अंतर्गत वैज्ञानिक और तकनीकी क्षेत्र के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को जापान के तकनीकी और शिक्षण संस्थाओं का मुआयना कराया जाता है। इस बार उत्तराखंड के दो छात्र-छात्राओं सहित कुल 28 छात्र भ्रमण पर गए थे। तकनीकी कौशल के अलावा प्रोजेक्ट बल्ब रिमूवर एंड कनेक्टर मॉडल (होल्डर में हाथ लगाए बगैर बल्ब लगाने और निकालने का मॉडल) के लिए प्रीति का जापान के लिए चयन किया गया था। भिंगराड़ा पहुंचने पर एक मई को स्कूल में उनका अभिनंदन किया जाएगा।