प्रीति ने अपने 42 सदस्यीय दल के साथ सोन मार्ग और द्रास सेक्टर से पहले गुमरी में 24 दिन की ट्रेनिंग करने के बाद दल को दो चोटी चढ़ने के विकल्प दिए, जिसमें माउंट स्टॉक कांगड़ी और दूसरा माउंट गोलेप कांगड़ी था।
दल में शामिल नौ लड़कियों में प्रीति पोखरिया भी शामिल थीं। प्रीति अपने दल के साथ माउंट गोलप कांगड़ी को चुन कर चोटी फतह करने निकल पड़ीं। दल की नौ लड़कियों में चोटी फतह करने वाली तीन में प्रीति सबसे पहले इस चोटी को फतह करने वाली थीं।
मालूम हो कि प्रीति के पिता लक्ष्मण सिंह पोखरिया मूलरूप से पिथौरागढ़ जिले के भागीचौरा गांव के रहने वाले थे। जो 23 वर्ष पूर्व खेतलसण्डा खाम खटीमा में बस गए हैं। प्रीति के पिता नौ कुमाऊं रेजीमेंट से कैप्टन रैंक से सेवानिवृत्त हुए हैं। प्रीति के दादा स्व. राम सिंह आसाम राइफल थे और भाभी हिमानी स्वास्थ्य विभाग में एएनएम हैं। प्रीती ने प्राथमिक शिक्षा से लेकर बीएससी खटीमा से किया और एमएससी देहरादून से किया है।