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रीढ़ की हड्डी हो चुकी फ्रैक्चर, फिर भी नहीं हारा हौसला, व्हील चेयर दौड़ जीतकर बन गईं मिसाल

Mon, 03 Dec 2018 07:25 PM IST
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, रानीखेत (अल्मोड़ा)
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गरिमा जोशी
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जज्बा हो तो कोई भी दिक्कत आड़े नहीं आती है। इसे सच कर दिखाया है उत्तराखंड की धावक गरिमा जोशी ने। गरिमा का दिल्ली स्थित स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार चल रहा है। सफदरजंग अस्पताल की ओर से आयोजित एक किमी की व्हील चेयर दौड़ में गरिमा ने पहला स्थान प्राप्त किया है। उन्हें सफदरजंग अस्पताल के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. राजेंद्र शर्मा ने सम्मानित किया है। गरिमा में दौड़ को लेकर गजब का जज्बा है। घायल होने के बावजूद वह प्रतियोगिताओं में अव्वल आकर क्षेत्र का नाम भी रोशन कर रही हैं। 

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मैराथन में हिस्सा लेने बंगलूरू गई धावक गरिमा जोशी को अभ्यास के दौरान इसी साल 31 मई को एक अज्ञात वाहन ने टक्कर मारकर घायल कर दिया था। हादसे में उसकी रीढ़ की हड्डी बुरी तरह फ्रैक्चर हो गई थी और पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। पहले उसका उपचार कर्नाटक मणिपाल अस्पताल में चला। अब वह दिल्ली स्पाइनल इंजरी सेंटर में उपचार करा रही है।

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पिता बोले, मां-बेटी दोनों के उपचार का आश्वासन दिया था सरकार ने 

गरिमा जोशी की माता आशा जोशी भी कैंसर से जूझ रही हैं। सफदरजंग अस्पताल के कैंसर वार्ड में उनका उपचार चल रहा है। पिता पूरन जोशी का आरोप है कि सरकार ने मां और बेटी दोनों का खर्च वहन करने का आश्वासन दिया था लेकिन अब वह अपने वायदे से मुकर गई है। वह स्वयं बेरोजगार हैं। इन हालातों में कैसे मां-बेटी का उपचार कराएं।

प्रदेश सरकार ने गरिमा के उपचार का खर्च उठाने का आश्वासन दिया था। पूरन जोशी का आरोप है कि सरकार ने 13.10 लाख रुपये देकर अब आगे के उपचार के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं, जबकि गरिमा अब भी व्हील चेयर के सहारे है। अभी उसके उपचार में काफी धन खर्च होना है। सरकार ने यदि पूरा उपचार नहीं करना था तो कोरे वायदे नहीं करने चाहिए थे। इस मामले में न तो मुख्यमंत्री सुनने को राजी हैं और न मंत्री।  
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