इस धनराशि को वापस पाने के लिए लंबे समय से कोशिश की जा रही थी। बृहस्पतिवार को केंद्रीय वन मंत्री प्रकाश जावेड़कर की अध्यक्षता में हुई राज्यों के वन मंत्रियों की बैठक में भी यह मुद्दा उठाया गया था। केंद्रीय मंत्री ने इस पर साकारात्मक पहल का आश्वासन दिया था। इस धनराशि के मिलने से कैंपा की विभिन्न योजनाओं का संचालन बेहतर तरीके से हो सकेगा। इस धनराशि की मदद से पुनर्वास के मामलों को भी हल किया जाएगा।
- हरक सिंह, वन मंत्री उत्तराखंड
19 हजार हेक्टेयर वन भूमि में पौधरोपण किया
कैंपा के तहत प्रदेश में 19000 हेक्टेयर वन भूमि में पौधरोपण किया गया है। बारिश के पानी को बचाने के लिए 5152 तालाब (वॉटर होल) बनाए गए, जिनमें लगभग 15 लाख लीटर जल संचित किया गया। इसी योजना के तहत प्रदेश सरकार ने कोसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए व्यापक स्तर पर पौधरोपण भी कराया।
वन मंत्री हरक सिंह के मुताबिक बैठक में उन्होंने केंद्रीय वन मंत्री के समक्ष उत्तराखंड में चीड़ के पेड़ों के कटान की अनुमति देने का भी आग्रह किया। हिमाचल को यह अनुमति मिल चुकी है और सबसे अधिक प्रभावित उत्तराखंड को अभी यह अनुमति नही मिल पाई है। चीड़ के पेड़ों से उत्तराखंड के जंगलों को खासा नुकसान हो रहा है। पहले भी उनकी ओर से केंद्र सरकार से एक हजार मीटर से ऊपर के चीड़ के पेड़ों को काटने की अनुमति मांगी गई थी।
भूमि हस्तांतरण का मुद्दा भी उठाया
वन मंत्री के मुताबिक बैठक में उन्हाेंने पांच हेक्टेयर तक की वन भूमि के हस्तांतरण का अधिकार प्रदेश सरकार को सौंपे जाने की भी मांग की। 2013 की आपदा के बाद यह अधिकार प्रदेश सरकार को दिया गया था। कुछ समय पहले ही यह अधिकार खत्म किया गया। अब सिर्फ एक हेक्टेयर तक की वन भूमि के अन्य प्रयोजनों के लिए हस्तांतरण का अधिकार प्रदेश सरकार के पास है। आपदा और विकास की जरूरत को देखते हुए प्रदेश सरकार को कम से कम पांच हेक्टेयर तक की भूमि के हस्तांतरण का अधिकार मिलना चाहिए। केंद्रीय वन मंत्री ने इस पर सकारात्मक पहल का आश्वासन दिया है।