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उत्तराखंड को औद्योगिक पैकेज देने में केंद्र ने बरती कंजूसी

Thu, 16 Jan 2014 09:09 AM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली/ देहरादून
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चुनावी साल में केंद्र सरकार ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश को विशेष औद्योगिक पैकेज का तोहफा दिया है। लेकिन चार साल के लिए मिले इस पैकेज से टैक्स छूट जैसे बड़े फायदे गायब हैं।
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जम्मू-कश्मीर को मिल चुका है बेहतर पैकेज
बुधवार को आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने दोनों राज्यों के लिए जो पैकेज मंजूर किया है, उसमें पुराने पैकेज के मुकाबले काफी कम रियायतें हैं। इससे बेहतर पैकेज पिछले साल जम्मू-कश्मीर को मिल चुका है।

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2003 में 2013 तक के लिए घोषणा के बाद उत्तराखंड को विशेष पैकेज के तहत मिलने वाली रियायतें 2010 में खत्म कर दी गई थीं। अब केंद्र ने पैकेज को 7 जनवरी, 2013 से 31 मार्च, 2017 तक जारी रखने की अनुमति दी है।
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15 फीसदी कैपिटल सब्सिडी का फायदा
इस पैकेज के तहत नई औद्योगिक इकाइयों और मौजूदा इकाइयों के पर्याप्त विस्तार के लिए प्लांट व मशीनरी पर 15 फीसदी कैपिटल सब्सिडी का फायदा मिलेगा।

लेकिन यह छूट सिर्फ उन्हीं इकाइयों को मिलेगी जो योजना के तहत पहले से पंजीकृत हैं और 31 मार्च 2017 तक उत्पादन शुरू कर दें। इसके अलावा और भी कई शर्तें लागू की गई हैं।

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मसलन, पुरानी इकाइयों में कम से कम 25 फीसदी विस्तार होना जरूरी है और सेकेंड हैंड मशीनरी की खरीद पर सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा।

हालांकि, केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री आनंद शर्मा ने दावा किया है कि इस सरकार के इस फैसले से उत्तराखंड और हिमाचल में औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

लेकिन दोनों पर्वतीय राज्यों को पैकेज देने के मामले में केंद्र ने काफी कंजूसी बरती है। गत 8 अक्तूबर को जम्मू-कश्मीर को मिले पैकेज में 15 फीसदी कैपिटल सब्सिडी के अलावा 3 फीसदी ब्याज छूट और 100 फीसदी इंश्योरेंस सब्सिडी भी दी गई है। लेकिन उत्तराखंड और हिमाचल इस तरह छूट से वंचित रह गए हैं।

उद्योगों को लुभाती थी टैक्स छूट
उत्तराखंड और हिमाचल को इंडस्ट्री का हब बनाने में यहां उद्योगों को मिलने वाली टैक्स छूट का बड़ा हाथ रहा है। 2003 में मिले पैकेज के तहत उद्योगों को उत्पादन में शुल्क में 10 साल के लिए और आयकर में 5 साल के लिए 100 फीसदी छूट मिलती थी।

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लेकिन केंद्र सरकार ने पैकेज पूरा होने से पहले ही टैक्स छूट से हाथ खींचना शुरू कर दिया था। तभी से खासकर उत्तराखंड में नए उद्योगों की रफ्तार थमने लगी।

कई विभागों की योजनाएं पैकेज से बाहर
केंद्र सरकार ने कांट-छांट के बाद उत्तराखंड और हिमाचल के लिए जो पैकेज मंजूर किया है, उसमें फूड-प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल जैसे मंत्रालयों की योजनाएं शामिल नहीं हैं। मूल पैकेज में दीन दयाल हथकरघा योजना और प्रधानमंत्री रोजगार योजना को भी पैकेज में शामिल किया गया था।

मध्यम, लघु उद्योगों को मिलेगा लाभ
केंद्र सरकार की ओर से बुधवार को उत्तराखंड को दिए गए विशेष औद्योगिक प्रोत्साहन पैकेज का लाभ प्रदेश के मध्यम और लघु उद्योगों को होगा।

इससे छोटी-छोटी इकाइयां लगने के साथ रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। पैकेज का लाभ 10 करोड़ तक की लागत से चलने वाली औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा।

सभी नई औद्योगिक इकाइयां और महत्वपूर्ण विस्तार वाली मौजूदा इकाइयां प्लांट और मशीनरी में अपने निवेश के 15 प्रतिशत की दर पर केंद्रीय सहायता के लिए पात्र होंगी।

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पैकेज मिलने पर मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने कहा कि पैकेज का लाभ सिर्फ औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत इकाइयों को ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में चल रही छोटी इकाइयों को मिलेगा।

बताया कि प्रदूषण और पर्यावरण के लिए लागू शर्तें पूर्व की तरह ही जारी रहेंगी। मध्यम और लघु औद्योगिक इकाइयों को बसाने और जमीन उपलब्ध कराने के लिए लालकुआं में 600 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जा रहा है। पहाड़ी इलाकों में भी जमीन तलाश कर छोटे 7-8 औद्योगिक हब बनाए जाएंगे।

सरकार कोशिश कर रही है कि बड़ी औद्योगिक इकाइयों को भी छूट का लाभ मिले।
- विजय बहुगुणा, मुख्यमंत्री

पैकेज पूरी तरह से छलावा है। पुराने औद्योगिक संस्थानों को यदि नई मशीन स्थापित करनी हो तो कोई सब्सिडी नहीं है। ऐसे में इस पैकेज से राज्य की आर्थिकी, औद्योगिक विकास या रोजगार के क्षेत्र में कोई सकारात्मक बदलाव नहीं आने वाला।
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- प्रकाश पंत, पूर्व संसदीय कार्यमंत्री
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