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पुराने मास्टर प्लान पर घिसट रहा चार शहरों का विकास

Tue, 16 May 2017 12:04 PM IST
विपिन बनियाल/  अमर उजाला, देहरादून
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शहरों की सूरत और सीरत बिगड़ती हो, तो बिगड़ने दीजिए। सरकारों और उसके पूरे सिस्टम को शायद इससे कोई लेना देना नहीं है। उत्तराखंड के चार प्रमुख शहरों के उदाहरण लीजिए। ये चार शहर हैं ऋषिकेश, श्रीनगर, काशीपुर और नैनीताल। इन चारों ही शहरों के मास्टर प्लान की मियाद 2011 में खत्म हो गई है।
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मगर छह साल में इन शहरों को नया मास्टर प्लान नहीं मिल पाया है। ये चारों शहर पुराने मास्टर प्लान पर ही घिसट रहे हैं, जबकि इन जगहों में आमूलचूल परिवर्तन हो चुका है। हाल-फिलहाल जो स्थिति है, उसमें नए मास्टर प्लान के जल्द लागू होने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

दरअसल, जब तक किसी शहर के लिए नया मास्टर प्लान लागू नहीं होता, तब तक पुराना ही लागू रहता है। उसी के हिसाब से योजनाएं बनती और क्रियान्वित होती हैं। ग्राम एवं शहरी नियोजन विभाग के मुख्य संयोजक एसके पंत के अनुसार, 1991 में लागू मास्टर प्लान की मियाद बेशक खत्म हो गई है, लेकिन यह अब भी प्रभावी है। वैसे, देखा जाए, तो अफसरों और बजट की कमी नए मास्टर प्लान की राह में सबसे बडे़ रोडे़ साबित हुए हैं।
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इसलिए जरूरी है मास्टर प्लान
किसी भी शहर में सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान का होना पहली शर्त है। मास्टर प्लान में पूरे शहर के लैंडयूज को विभिन्न श्रेणियों में बांट दिया जाता है। उसी के हिसाब से निर्माण की अनुमति होती है।

यानी मास्टर प्लान में जिस इलाके को आवासीय घोषित किया जाता है, वहीं पर घर बनाए जा सकते हैं। इसी तरह, शैक्षणिक, औद्योगिक, व्यवसायिक, कृषि जैसी तमाम श्रेणियां बनाई जाती है। निर्धारित लैंडयूज पर अलग तरह के निर्माण पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान होता है।

जिन भी शहरों में मास्टर प्लान की अवधि खत्म हो गई है, वहां के लिए जल्द ही नया मास्टर प्लान तैयार कराया जाएगा। सरकार शहरों के सुनियोजित विकास के लिए वचनबद्ध है।
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- मदन कौशिक, आवास मंत्री
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