इसको ठुकराने के बाद उनसे कहा गया था कि वह विधायकों की सदस्यता खत्म न करें, बदले में उन्हें सीएम बनवा दिया जाएगा। इस खुलासे के बाद भाजपा अब कुंजवाल पर लगातार हमले कर रही है। कुंजवाल को लेकर कांग्रेस के भीतर भी बिखराव है। प्रभारी अनुग्रह नारायण सिंह एक दिन पहले कह चुके हैं कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं रही है।
सोमवार को ‘अमर उजाला’ से बातचीत में पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा कि उस वक्त खरीद-फरोख्त के प्रयास हुए थे, इसकी जानकारी खुद विधायकों ने मीडिया को दी थी। 27 मार्च 2016 को स्पीकर का नौ विधायकों की सदस्यता पर फैसला आना था, जबकि 28 मार्च 2016 को फ्लोर टेस्ट था।
इन स्थितियों में स्पीकर की सुरक्षा को लेकर सरकार और उसकी पूरी मशीनरी चिंतित थी। खबरें ये भी थीं कि कुंजवाल को उठाया जा सकता है। इसलिए हमने पूरी एहतियात रखी। रावत ने कहा कि उस वक्त चूंकि हम कानूनी लड़ाई में चले गए थे, इसलिए कुंजवाल ने खुलासा करना मुनासिब नहीं समझा था।