मुख्यमंत्री धामी एक्शन मोड में
वनाग्नि को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी एक्शन मोड में आ गए हैं। सीएम ने सभी जिलों में डीएफओ को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दे चुके हैं। सीएम का यह भी कहना है कि अधिकारी यह तय कर लें कि कहीं वनाग्नि की घटना न हो यदि इसके बाद भी घटना होती है तो जिम्मेदारी के साथ इसकी रोकथाम के लिए कदम उठाए। उधर, मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने वनाग्नि के लिए अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं।
अब तक वनाग्नि की हो चुकीं 490 घटनाएं
राज्य में बुधवार को वनाग्नि की 13 घटनाएं हुई हैं। इसे मिलाकर अब तक राज्य में 490 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 580 हेक्टेयर से अधिक वन क्षेत्र में वन संपदा को नुकसान हुआ है। वनाग्नि की अब तक की घटनाओं में 204 घटनाएं गढ़वाल और 242 कुमाऊं मंडल के जंगलों की हैं, जबकि 44 घटनाएं वन्य जीव क्षेत्र की हैं।
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जंगल की आग बुझाने के लिए झाप का इस्तेमाल किया जा रहा है। झाप से आग बुझाई जा सकती है या फिर बारिश होने पर यह बुझ सकती है। -आरके सुधांशु प्रमुख सचिव वन
यह है झाप या झापा
जंगल में वृक्ष की हरी टहनियों को तोड़कर उसे आग पर मारा जाता है। आसपास से एकत्र की गई इन टहनियों को झाप या झापा कहा जाता है। बताया गया कि विभाग ने लोहे की भी झाप बनाए हैं।