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जांच के नाम पर सूचना न देना वन विभाग को पड़ा भारी, राज्य सूचना आयुक्त ने कही ये बात

Fri, 17 Jan 2020 10:00 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • राज्य सूचना आयुक्त ने कहा, क्यों न लगाया जाए 25 हजार रुपये का जुर्माना
  • अपीलीय अधिकारी को भी आरटीआई का दोबारा अध्ययन करने का आदेश
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विस्तार
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मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह ने लोक सूचना अधिकारी के रूप में मुख्य वन संरक्षक कार्यालय गढ़वाल में तैनात मुख्य प्रशासनिक अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि क्यों न उन पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाए। आयुक्त ने अपीलीय अधिकारी से कहा कि वे सूचना के अधिकार अधिनियम का फिर से अध्ययन कर लें।

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ऋषिकेश निवासी विनोद कुमार जैन की सूचना आवेदन के आधार पर प्रमुख वन संरक्षक ने जांच के आदेश दिए थे। लोक सूचना अधिकारी का कहना था कि जांच पूरी होने के बाद ही आवेदक को सूचना दी जा सकती है और जांच अभी जारी है। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि किसी भी स्थिति में अधिकतम 30 दिन के अंदर सूचना देनी होती है। नौ अप्रैल 2019 को जांच के आदेश दिए गए थे।

17 जून को प्रथम अपील की गई थी। साफ है कि दो माह में भी सूचना नहीं दी गई। 26 दिसंबर 2019 को राज्य सूचना आयोग में इस मामले की सुनवाई हुई। मतलब यह कि प्रथम अपील को भी समय से नहीं निपटाया गया। अब इस मामले की सुनवाई 22 जनवरी 2020 को होगी। मुख्य सूचना आयुक्त ने लोक सूचना अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी किया और 22 जनवरी की सुनवाई में लिखित रूप से जवाब दाखिल करने को कहा।
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सात महीने में दी सूचना, चार को कारण बताओ नोटिस 

हरिद्वार निवासी शुभम कुमार को नगर निगम हरिद्वार के लोक सूचना अधिकारी कार्यालय ने सात माह बाद सूचना दी। इस दौरान चार सूचना अधिकारी भी बदल गए। मुख्य सूचना आयुक्त शत्रुघ्न सिंह ने इन चारों अधिकारियों को 25-25 हजार रुपये के जुर्माने का कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस मामले की सुनवाई 13 फरवरी को होगी।

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