बाबा हमतैं भी बचै द्यावा, यख न त पाणि च आणू अर न बाटा घाटा छन बच्यां। (बेटा हमको बचा दो, यहां पानी नहीं आ रहा है और रास्ते भी नहीं बचे हैं।) सोमवार को ‘अमर उजाला’ को फोन पर अपना दुखड़ा सुनाते हुए स्वर्का (मल्ला) गांव की महिलाएं फफक पड़ी। महिलाओं ने कहा कि यहां न तो अधिकारी और न जनप्रतिनधियों ने उनकी सुध ली है।
गत बुधवार को हुई भारी बारिश ने स्वर्का गांव का भूगोल बिगाड़ दिया है। यहां हुए भू-स्खलन से पेयजल लाइन तो टूटी ही है, डेढ़ किमी दूर एक मात्र पेयजल स्रोत जाने का रास्ता करीब 500 मीटर धंस गया है। सोमवार सुबह साढ़े नौ बजे गांव की सतेश्वरी देवी ने ‘अमर उजाला’ को फोन से बताया कि बिना पानी के गांव में मवेशी मरने के कगार पर हैं।
संपर्क मार्ग ध्वस्त
हालात ऐसे हैं कि निकटवर्ती गांव धल, तल्ला स्वर्का, कांचुला और चमाली को जोड़ने वाले संपर्क मार्ग ध्वस्त हो चुके हैं। गुड्डी देवी ने बताया कि गांव में चार परिवार रह रहे हैं। छह दिन से बिना पानी के मवेशी मरने के कगार पर हैं और रास्ते बंद होने से अकाल जैसे हालात हो सकते हैं। इधर, प्रधान राजेंद्र असवाल के अनुसार स्वर्का का संपर्क चारों ओर से कट चुका है, जिससे वहां का निरीक्षण करना भी मुश्किल हो गया है।
स्वर्का तल्ला में भू-स्खलन का मामला मेरे संज्ञान में है, लेकिन स्वर्का मल्ला की जानकारी नहीं है। समस्या को नोट कर दिया है। जल्द संबंधित अधिकारियों को मौके पर भेजकर हल किया जाएगा।
-राहुल कुमार गोयल, उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग