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यहां भी धड़ल्ले से होता है खनन का कारोबार

Tue, 30 Jul 2013 10:52 AM IST
अजित सिंह राठी
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उत्तराखंड में भी नेताओं व अफसरों के सिंडीकेट का अवैध खनन का कारोबार जारी है। बड़े अफसरों को हटवाने के लिए सुपारी तक लेने के किस्से चर्चा में रहे हैं। चारों मैदानी जिले खनन माफियाओं के लिए कुबेर का खजाना बन गए हैं। कई बार अफसरों के ऊपर जानलेवा हमले भी हुए।
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हर रोज 30 लाख से ज्यादा का अवैध खनन
कुमाऊं की कोसी व दाबका नदियों में हर रोज 30 लाख रुपये से ज्यादा का अवैध खनन होता है। इस कारोबार के अड़ंगे को हटाने में कुछ राजनेता और नौकरशाह खासे सक्रिय हैं। ऊधमसिंहनगर की नदियों से माल निकालकर रातोंरात यूपी के रामपुर जनपद में लगे पंद्रह व रामनगर के दो स्टोन क्रशर में बेचा जाता है।

रामनगर व बाजपुर तहसील में सबसे ज्यादा अवैध खनन होता है। कोसी नदी लगभग 10-15 किलोमीटर ही यूएसनगर में है और इसके बाद डाउन स्ट्रीम में रामपुर जिला शुरू हो जाता है। खनन माफियाओं के लिए यह सबसे कमाऊ जोन है।
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रुड़की, हरिद्वार और देहरादून में जमकर अवैध खनन
गढ़वाल में रुड़की, हरिद्वार और देहरादून में जमकर अवैध खनन हो रहा है। राज्य की सीमा में यमुना नदी में खनन प्रतिबंधित है, लेकिन हिमाचल की तरफ खुली है। खनन की इजाजत नहीं है, लेकिन भंडारण के बहाने बड़ी मात्रा में सामग्री इधर से उधर होती है।

नेताओं व अफसरों के इस गठजोड़ ने पिछले दिनों देहरादून के एसएसपी केवल खुराना को हटवाने की सुपारी भी ली थी, लेकिन यह संभव नहीं हो सका। इससे पहले विकासनगर के एक एसडीएम को हटाने के बाद स्वयं सीएम को ही हस्तक्षेप करना पड़ा।

देहरादून के जिलाधिकारी रहे दिलीप जावलकर ने शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजी थी, जो रद्दी की टोकरी में डाल दी गई। विकासनगर क्षेत्र में भंडारण के बहाने सिंडिकेट जबरदस्त अवैध खनन कर रहा है। हरिद्वार में भी एक मंत्री के समर्थक नेताओं का अवैध खनन का कारोबार जारी है। एक कैबिनेट मंत्री के साझीदार का चिड़ियापुर रेंज के पास कारोबार है, वहीं डोईवाला के पास नदी में एक विधायक केचुगान के पट्टे हैं।
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हाकिमों पर हुए हमले
- वर्ष 2010 में डाकपत्थर बैराज पर एसडीएम के वाहन को ट्रक से टक्कर मारी गई।
- वर्ष 2011 में तहसीलदार के वाहन को पलट दिया गया।
- वर्ष 2011 में आदूवाला में नायब तहसीलदार की टीम पर पत्थरों से हमला हुआ।
- अक्टूबर 2011 में रामपुर मंडी में वन विभाग के रेंजर के साथ मारपीट हुई।
- फरवरी 2012 में नायब तहसीलदार से खनन करते वाहनों को छुड़ाने को हमला हुआ
- मार्च 2012 में पुलिस टीम पर खनन माफिया ने हमला किया।

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