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राजधानी में हरे हुए आपदा के जख्म

Wed, 04 Dec 2013 04:22 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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केदारधाम में आई आपदा को कोई याद नहीं करना चाहेगा, लेकिन उस वक्त किस तरह आईटीबीपी के जवानों ने अपनी जान जोखिम में डाल लोगों की जान बचाई यह देखना है तो परेड ग्रांउड चले आइए।
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दर्शक बड़ी संख्या में जुटे
यहां लगे नार्दर्न इंडिया इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में आईटीबीपी औली की ओर से स्टॉल लगाया गया है, जिसमें रेस्क्यू पर आधारित डेढ़ घंटे की फिल्म दिखाई जा रही है। इसे देखने दर्शक बड़ी संख्या में जुट रहे हैं।

इसके साथ ही इस स्टॉल पर आपदा के वक्त की तस्वीरें लगाई गई है। रेस्क्यू में प्रयोग किए उपकरण सर्च लाइट, स्विस नाइफ आदि भी प्रदर्शित किए गए हैं। एएसआई जीडी माधव सिंह के अनुसार फिल्म प्रदर्शन का मकसद लोगों को हर वक्त तैयार रहने का संदेश देना है।
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साथ ही तस्वीरों के माध्यम से उनका परिचय उन परिस्थितियों से भी कराने का उद्देश्य है, जिसमें एक जवान को रहना और अपने कार्य को अंजाम देना होता है।

आरोप्लास्टी ठीक करेगी बगैर दर्द व सर्जरी
कानों के छेद बडे़ हो गए हों या कटे हों उन्हें बिना दर्द और सर्जरी के ठीक किया जा सकता है। परेड ग्रांउड में लगे ईयर लॉब केयर सेटर के स्टॉल पर बगैर सर्जरी कान ठीक कराने वाले आते रहे।

सेंटर के निदेशक डॉ. एसके अग्रवाल का दावा है कि ऐसा दून में पहली बार हो रहा है। इस थेरेपी को आरोप्लास्टी कहते है। यह लोकप्रिय हो रही है।

सोलर टेबल लैंप, टार्च भी भा रहे
विकलांग बच्चों के बनाए सोलर टेबल लैंप और टार्च भी खरीदारों को भा रहे हैं। केवल एक घंटा धूप में रखने पर इन्हें सारी रात जलाया जा सकता है। स्टॉल विक्रेता उषा का कहना है कि इन टॉर्च और लैम्प का पैसा विकलांग बच्चों को जाता है। पिछले सात साल से वे इन्हें बेचने आ रही हैं। इनकी कीमत 120 से लेकर डेढ़ सौ रुपए के बीच है।
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