राज्य सरकार पांच नगर निकायों में अगले साल फरवरी तक चुनाव करा सकती है। सेलाकुई के बाद भतरौंजखान नगर पंचायत की कानूनी बाधा भी दूर हो गई है।
इसके बाद, अब सरकार नगर निगम रुड़की, नगर पालिका श्रीनगर और बाजपुर के साथ ही इन दो नगर पंचायतों में भी चुनाव की तैयारी में जुटने जा रही है। हाईकोर्ट ने सरकार को पूर्व में 31 दिसंबर 18 तक रुड़की और बाजपुर नगर निकाय के चुनाव कराने के आदेश दिए थे, मगर इस समयावधि में यह संभव नहीं दिखाई दे रहा है। सरकार हाईकोर्ट में जल्द ही अपना पक्ष रखने जा रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार दो की जगह पांचों नगर निकायों में चुनाव कराने की मंशा हाईकोर्ट के सामने रखेगी।
प्रदेश के 84 नगर निकायों में अभी कुछ दिन पहले ही चुनाव हुए हैं। रुड़की, बाजपुर, श्रीनगर, सेलाकुई और भतरौंजखान चुनाव प्रक्रिया से बाहर रहे। ये पांचों नगर निकाय वे हैं, जो बहुत बुरी तरह कानूनी दांवपेंच में उलझे रहे। चुनाव से पूर्व रुड़की, बाजपुर और श्रीनगर के मामले में कानूनी अड़चन तो दूर हुई, लेकिन सीमा विस्तार, परिसीमन और आरक्षण जैसी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण यहां चुनाव नहीं कराए जा सके। सेलाकुई और भतरौंजखान नगर पंचायत के कानूनी प्रकरण चुनाव के बाद अब निस्तारित हो गए हैं। हाईकोर्ट ने 20 नवंबर 18 को सेलाकुई नगर पंचायत के वजूद को बरकरार रखने के लिए रास्ता खोल दिया। 2016 में नगर पंचायत गठन के तुरंत बाद स्टे की जद में आए भतरौंजखान नगर पंचायत के मामले में भी सरकार के लिए अब खुशखबरी आ गई है। इन स्थितियों के बाद, पहले जो सरकार सिर्फ तीन निकायों में चुनाव की तैयारी कर रही थी, उसनी प्राथमिकता में अब पांच निकायों में चुनाव कराना शामिल हो गया है।
भतरौंजखान नगर पंचायत - एक नजर
28 दिसंबर 16 को अस्तित्व में आई थी नगर पंचायत
2350 की जनसंख्या है अल्मोड़ा जिले के भतरौंजखान में
02 साल से इस नगर पंचायत के गठन पर था स्थगन
जिन नगर निकायों में चुनाव नहीं हुए हैं, वहां पर जल्द से जल्द कराने के लिए सरकार प्रतिबद्घ है। सरकार को सभी कानूनी अड़चन दूर करने में कामयाबी मिली है। अब शहरी विकास विभाग तेजी से चुनाव की प्रक्रिया पूरी करने में जुट गया है।
- मदन कौशिक, मंत्री, शहरी विकास विभाग
नगर पंचायत के नाम पर कुछ नहीं है भतरौंजखान में
अल्मोड़ा की भतरौंजखान नगर पंचायत कहने भर को नगर निकाय है। वहां पर कुछ भी ऐसा नहीं है, जो नगर पंचायत का अहसास कराता हो। इसकी एक वजह ये है कि अपने गठन के कुछ दिन बाद ही यह स्टे के दायरे में आ गया। जिस सेलाकुई नगर पंचायत की कानूनी बाधा दूर हुई है, वहां तीन साल तक नगर पंचायत सुचारु रूप से चलती रही। वहां पर अधिशासी अधिकारी समेत कुछ स्टाफ भी तैनात रहा। मगर भतरौंजखान के साथ ऐसा कुछ नहीं हो पाया। चुनाव समाप्त होने के बाद भतरौंजखान नगर पंचायत के वजूद पर मंडरा रहा संकट भी खत्म हो गया है। हालांकि सरकार को वहां चुनाव कराने के साथ ही, आधारभूत ढांचा खड़ा करने के लिए भी युद्घस्तर पर काम करना होगा।