1. जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय देहरादून और हरिद्वार।
2. उत्तराखंड अल्पसंख्यक कल्याण।
(इनमें पिछले कई साल से ऑडिट हुआ ही नहीं। इसी वजह से इन तीनों मामलों को हाई रिस्क ऑडिट में रखा गया है।)
3. वीर चंद्र सिंह गढ़वाली औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, भरसार
(पिछले कुछ समय से कई मामले सामने आए हैं।)
4. सिंचाई खंड काशीपुर।
(वित्तीय अनियमितता एवं टीडीएस कटौती के कई मामले सामने आए हैं।)
5. पीटीए शिक्षक एवं अन्य शिक्षकों के मामले।
(इस ऑडिट को लेकर भी वित्त विभाग खासा संजीदा है। यहां नियम विरुद्ध नियुक्ति से लेकर नियमितीकरण तक के मामले की लेखा परीक्षा होनी है। यही वजह है कि इसको हाई रिस्क ऑडिट में रखा गया है।)
6. नदेही चीनी मिल और डोईवाला चीनी मिल।
(डोईवाला चीनी मिल में कुछ समय पहले ही विवाद सामने आया था। इसी तरह से नदेही का मामला भी है।)
7. बीएचएल गृह निर्माण समिति हरिद्वार।
(वित्त विभाग के मुताबिक इस समिति में पहले भी ऑडिट हुआ, लेकिन यहां करोड़ों के घपले की आशंका है।)
8. प्रभारी चिकित्साधिकारी कर्मचारी राज्य बीमा औषद्यालय रुद्रपुर।
(यहां दवा से लेकर अन्य कई तरह के मामले सामने आए हैं।)
सामान्य ऑडिट की तुलना में हाई रिस्क ऑडिट करने से वित्तीय अनियमितता से लेकर गबन तक के मामलों को पकड़ा जा सकेगा। हाई रिस्क ऑडिट के लिए दिशा-निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं।
- अमित नेगी, सचिव वित्त एवं नियोजन