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उत्तराखंड: अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए धार्मिक पाठ्यक्रम तैयार, ये विद्यार्थी होंगे शामिल

Sat, 17 Oct 2026 11:30 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

उत्तराखंड में अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों की पढ़ाई के लिए एक और कदम उठाया गया है। राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्रों के लिए धार्मिक पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया है। अब इसे अनुमोदन के लिए शासन के शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा।
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राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ सुरजीत सिंह गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की बैठक में अल्पसंख्यक समुदायों के कक्षा नौ से 12वीं तक के छात्रों के लिए धार्मिक पाठ्यक्रम को अंतिम रूप दिया गया। बैठक में मुस्लिम, जैन, सिख, बौद्ध एवं ईसाई समुदायों से जुड़े शिक्षाविदों ने अपने-अपने विषयों के पाठ्यक्रम पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और उन्हें अंतिम रूपरेखा प्रदान की।

प्राधिकरण की ओर से बताया गया कि कक्षा एक से आठवीं तक के धार्मिक पाठ्यक्रम को पहले ही जारी किया जा चुका है। अब कक्षा नौ से 12 वीं के लिए तैयार पाठ्यक्रम को अनुमोदन के लिए उत्तराखंड शासन के शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा। अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में इसे महत्वपूर्ण पहल बताते हुए प्राधिकरण ने कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है, जहां एक जुलाई 2026 से उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण ने कार्य करना शुरू किया है।

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शिक्षाविदों के सहयोग से तैयार किए गए पाठ्यक्रम
प्राधिकरण का उद्देश्य अल्पसंख्यक समुदायों के विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ मुख्यधारा से जोड़ना है। इसके साथ ही उन्हें अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक विरासत को व्यवस्थित रूप से समझने का अवसर उपलब्ध कराना है।

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प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने कहा कि विभिन्न समुदायों के शिक्षाविदों के सहयोग से तैयार किए गए पाठ्यक्रम को शासन के शिक्षा विभाग से अनुमोदन मिलने के बाद आगे लागू करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ अपनी परंपराओं, इतिहास, दर्शन और सांस्कृतिक विरासत की जानकारी मिलना आवश्यक है। इससे विद्यार्थी ज्ञान, कौशल और संस्कारों से समृद्ध होकर राष्ट्र के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकेंगे।

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