पंचायतों व स्थानीय निकायों की आर्थिक स्थिति की समीक्षा करने के लिए प्रदेश सरकार ने पांचवें राज्य वित्त आयोग का गठन कर दिया है। पूर्व आईएएस अधिकारी इंदु कुमार पांडेय को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। वे राज्य सरकार के वित्त सलाहकार और वेतन विसंगति समिति के अध्यक्ष रहे हैं। आयोग में पूर्व आईएएस अधिकारी डॉ.एमसी जोशी सदस्य और अपर सचिव वित्त भूपेश चंद्र तिवारी को सदस्य सचिव बनाया गया है।
सचिव वित्त अमित सिंह नेगी ने आयोग के गठन के संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। पांडेय तीसरे राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। आयोग का कार्यकाल एक वर्ष का होगा। समिति तय करेगी कि राज्य सरकार के स्वयं के करों में से कितना हिस्सा पंचायतों और स्थानीय निकायों को दिया जाए। उसकी सिफारिशों पर सरकार का पंचायतों और निकायों के लिए करों की हिस्सेदारी का निर्धारण करेगी। आयोग को यह शक्ति होगी कि वह किसी भी अधिकारी से सूचना व अभिलेख की मांग कर सकता है। इसके लिए किसी व्यक्ति को बुला सकता है।
पंचायत व नगरीय क्षेत्रों में उनकी क्षमता के आधार पर अगले पांच वर्षों के लिए राजस्व संसाधन तथा अतिरिक्त संसाधन एकत्रित करने के लिए निर्धारित किए गए लक्ष्य और इस दिशा में किए गए प्रयासों की समीक्षा करेगा। आयोग 31 मार्च 2020 तक पंचायतों व निकायों में ऋण की स्थिति का आकलन करेगा। ऐसे सुधारात्मक उपाय बताएगा जो राज्य की वित्तीय आवश्यकताओं के हिसाब से आवश्यक हों। आयोग यह भी बताएगा कि यदि करों में निर्धारित हिस्सेदारी के बाद भी पंचायतों और निकायों की आवश्यकताएं पूरी नहीं होती हैं तो वित्तीय प्रबंध के दूसरे विकल्प क्या होंगे। आईटी का उपयोग व कर्मचारियों का ढांचे का निर्धारण भी आयोग करेगा।
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