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कैलाश मानसरोवर मार्ग पर बादल फटने से आया सैलाब, सेना के ट्रक और तीन होटल बहे

Tue, 15 Aug 2017 08:22 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, देहरादून
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2013 में केदारनाथ आपदा के बाद उत्तराखंड में फिर प्रकृति ने कहर बरपाया है। राज्य के पि‌थौरागढ़ से लगी चीन सीमा के पास मालपा में बादल फटने से छह लोगों की मौत हो गई, जबकि सेना के पांच जवान सहित नौ लोग लापता हैं। बादल फटने से आई बाढ़ ने मालपा क्षेत्र में तबाही मचा दी है।
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वहीं ऑल इंडिया रेडियो ने ट्विटर पर इस त्रासदी में 16 लोगों के मरने की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, मंत्री प्रकश पंत व सुबोध उनियाल पिथौरागढ़ के लिए रवाना हो चुके हैं। वहीं सेना के जवान भी मौके पर तैनात हैं। बताया गया कि बादल फटने की घटना रात्रि 2 बजकर 45 मिनट की है।

मालपा में नाला ऊफान पर आने से तीन होटल बहने की भी खबर है। चीन सीमा पर दूरस्‍थ इलाका होने के कारण राहत-बचाव कार्य में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मालपा में इतनी बड़ी त्रासदी में दर्जनों लोगों के घायल होने की खबर है।  आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव अमित नेगी ने बताया कि मालपा में बादल फटने की घटना में छह लोगों की मौत की खबर है। वहीं पांच जवानों सहित नौ लोग लापता हैं।
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आपदा के मद्देनजर देहरादून के जौलीग्रांट अस्पताल व हल्‍द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल को अलर्ट जारी कर दिया गया है। 

मांगती नाले के पास सेना के तीन ट्रक बह

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धारचूला के मांगती मालपा क्षेत्र में बादल फटने से मची तबाही में मांगती नाले के पास सेना के तीन ट्रक बह गए हैं। अब तक छह लोगों के शव नाले से निकाले गए हैं। शव सेना के जवानो के हैं या किसके पता नही चल सका है। 

पांगला से लेकर मालपा तक जगह-जगह भूस्खलन से भारी तबाही मची। यह मार्ग कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग है। मालपा नाले के दूसरी और कैलास मानसरोवर यात्रियों को दिन का भोजन यही पर कराया जाता है।

भारत चीन व्यापार में जाने वाले और उच्च हिमालयी गावो के लोग धारचूला आने जाने के दौरान रात्रि विश्राम भी करते हैं। 
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बादल फटा - फोटो : SELF
बताया क‌ि इससे पहले भी यहां प्रकृति कहर बरपा चुकी है। 18 अगस्त 1998 में मालपा क्षेत्र में बादल फटने की घटना हुई थी।

इस घटना में 60 कैलाश मानसरोवरी यात्रियों के साथ करीब 300 लोगों की मौत हुई थी। इसके साथ ही जुलाई 2006 में भी इस क्षेत्र में बादल फटा था, जिसमें 16 खच्चर बह गए थे और तीन लोगों की मौत हो गई ‌थी।

सोमवार को प्रदेश के मा. मुख्य मंत्री द्वारा जनपद पिथौरागढ़ के तहसील धारचूला ,बंगापानी आपदाग्रस्त क्षेत्र का हवाई सर्वेक्षण किया गया। तत्पश्चात मुख्यमंत्री द्वारा नैनी सैनी हवाई पट्टी में अधिकारियों के साथ बैठक कर आपदा राहत कार्यों के सम्वन्ध में जानकारी लेने के साथ ही आवश्यक निर्देश दिए गए। मौसम खराब होने के कारण मुख्यमंत्री रावत उच्च हिमालयी क्षेत्र का भ्रमण नहीं कर पाए।
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