उत्तराखंड शिक्षा विभाग में विस्थापित शिक्षकों के तबादलों के नाम पर खेल चल रहा है। कुछ शिक्षकों की भूमि का अधिग्रहण हुआ है, लेकिन इन शिक्षकों को विस्थापन का लाभ देते हुए उनके सुविधाजनक स्थानों पर तबादले कर दिए गए हैं। शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि इस मामले में न सिर्फ संबंधित शिक्षक बल्कि अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
पिथौरागढ़ जिले में तैनात बेसिक के शिक्षक की टिहरी जिले में सड़क मार्ग के निर्माण के दौरान कुछ भूमि का अधिग्रहण किया गया, लेकिन संबंधित शिक्षक को विस्थापन का लाभ देते हुए उनका पिथौरागढ़ से हरिद्वार जिले में तबादला कर दिया गया है। जबकि मार्ग के निर्माण के दौरान भूमि अधिग्रहण पर संबंधित व्यक्ति को लोक निर्माण विभाग की ओर से इसके लिए मुआवजे की राशि दी जाती है । विभागीय सूत्रों के मुताबिक संबंधित शिक्षक ने इससे पहले तीन से चार मेडिकल बनवाकर हरिद्वार के सुविधाजनक स्कूल में तबादले का प्रयास किया। लेकिन इससे बात नहीं बनी।
इसके बाद भूमि अधिग्रहण के प्रमाण पत्र के आधार पर शिक्षक को तबादले का लाभ दे दिया गया । जबकि विभाग के आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षक के पास विस्थापन का प्रमाण पत्र नहीं है। शिक्षक की केवल नरेंद्र नगर मार्ग में भूमि का अधिग्रहण किया गया है। वहीं इसी तरह सात अन्य शिक्षकों के भी विस्थापन के नाम पर सुविधाजनक स्कूलों में तबादले किए गए हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि इसमें भी कुछ शिक्षक ऐसे हैं जिनकी भूमि का अधिग्रहण हुआ, लेकिन विभाग की ओर से उन्हें विस्थापन का लाभ देते हुए उनके तबादले किए गए हैं।
तबादलों में ऐसे हो रहा खेल
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 2 दिसंबर 2019 को बैठक हुई । 20 दिसंबर 2019 को विभाग के प्रस्तावों के आधार पर तबादले का आदेश जारी हुआ। जबकि शिक्षक का भूमि अधिग्रहण का प्रमाण पत्र 26 अगस्त 2020 का है।
भूमि अधिग्रहण नहीं केवल विस्थापन होने पर शिक्षकों को तबादलों में छूट का लाभ दिया जा रहा है यदि भूमि अधिग्रहण वाले शिक्षक को तबादलों का लाभ दे दिया गया है तो इस मामले को दिखवाकर संबंधित शिक्षक और अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-आर मीनाक्षी सुंदरम, शिक्षा सचिव