सरकार ने मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए मधु ग्राम योजना शुरू की है। इस योजना के तहत प्रत्येक जिले में न्याय पंचायत स्तर पर एक मधु ग्राम स्थापित किया जाएगा। जिसमें सरकार की ओर से 500 मौन बॉक्स दिए जाएंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में एपिस सिराना इंडिका और मैदानी क्षेत्रों में एपिस मैलीफेरा मधुमक्खी मौन बाक्स के साथ दी जाएगी। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सभी जिला उद्यान अधिकारियों के माध्यम से मौनपालन करने वाले लाभार्थियों का चयन किया जा रहा है।
कोविड महामारी से बढ़ी शहद की मांग
प्रदेश में सालाना 2200 मीट्रिक टन शहद उत्पादन होता है। कोविड महामारी के दौरान शहद की मांग बढ़ी है। पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादित शहद 500 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिक रहा है। सरकार की योजना है कि मधु ग्राम योजना के न्याय पंचायत स्तर पर उत्पादित शहद को एकत्रित कर दूसरे देशों को निर्यात किया जाएगा। इससे मौनपालकों को ज्यादा दाम मिलेंगे।
उत्तराखंड में मौनपालन स्वरोजगार का सबसे बढ़िया साधन है। मौनपालन से कम मेहनत पर ज्यादा आमदनी प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक जिले में न्याय पंचायत स्तर मधु ग्राम स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उत्तराखंड के शहद की काफी मांग है।
-एचसी तिवारी, संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग
किसानों की आर्थिकी किस तरह से मजबूत हो सकती है। इसके लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं शुरू की गई हैं। प्रदेश में शहद उत्पादन की अपार संभावनाएं है। यहां का शहद जैविक है। सरकार ने मौनपालन के लिए 80 प्रतिशत सब्सिडी देने की व्यवस्था की है।
-सुबोध उनियाल, कृषि एवं उद्यान मंत्री