व्यापारी से लेकर उद्योगपति तक सब चाय की चुस्कियों के साथ इस पार्टी का हिस्सा थे। दिव्या रावत प्रमोशन के इस नए अंदाज से खासी उत्साहित दिखीं। रावत बार-बार दोहराते रहे-उनके यहां आने का मकसद सियासी कतई नहीं है। सिर्फ पहाड़ की बेटी और उसके प्रोडक्ट का प्रमोशन करना चाहते हैं।
इन स्थितियों के बीच, अपने मुख्यमंत्री काल की कई बातों का उन्होंने जिक्र किया। परोक्ष रूप से त्रिवेंद्र सरकार को आईना भी दिखाया कि किस तरह प्रमोशन के इस तरह के कार्यक्रमों से वह दूर है।
कीड़ा जड़ी पार्टी में पूर्व सीएम हरीश रावत ने समूह में बंटकर लोगों से सीधा संवाद किया। गंभीर विषय के साथ हल्का-फुल्का मूड भी बने, इसलिए जागर सम्राट प्रीतम भरतवाण से गढ़वाली गीत का अनुरोध करने से भी नहीं चूके।
भरतवाण ने भी पहाड़ और यहां की बेटियों की महिमा का बखान करते हुए गीत सुनाया। इस बीच, रावत ने ये एलान भी किया कि वह अपनी पेंशन का एक हिस्सा कीड़ा जड़ी चाय के प्रमोशन के लिए दे रहे हैं। सीएम रहते हुए पहाड़ की तमाम चीजों के प्रमोशन के लिए हरीश रावत ने बाकायदा मुहिम छेड़ी थी। चाय पार्टी के जरिये ये संदेश देने से भी वह पीछे नहीं रहे, कि पहाड़ और यहां के लोगों से जुडे़ हर मामले में उनकी मुहिम थमी नहीं है।