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जुबां पर ना, दिल से फिर चुनावी पारी खेलने के तैयार 'हरदा'

Mon, 16 Jul 2018 07:30 AM IST
चंदन बंगारी, अमर उजाल, रुद्रपुर
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harish rawat
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उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की नजर नैनीताल लोकसभा सीट पर टिकी हुई है। हरदा के करीबी और समर्थक उनके लिए जमीन मजबूत करने में जुटे हुए हैं। खुद हरदा भी अलग-अलग मौकों पर विधानसभा क्षेत्रों में सक्रियता बरकरार रखे हुए हैं। इतना ही नहीं ‘हरीश रावत नैनीताल लोकसभा’ नाम से फेसबुक पेज भी संचालित हो रहा है, लेकिन उनकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा इंदिरा गुट का है। इंदिरा गुट का प्रभाव लोकसभा सीट पर मजबूत है। इसको बखूबी समझते हुए हरदा चुनाव लड़ने का फैसला हाईकमान पर डालकर खुद की दावेदारी से बेशक इनकार कर रहे हैं। 

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दरअसल, विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करने के बाद भी पूर्व सीएम हरीश रावत विभिन्न गतिविधियों में बेहद सक्रिय हैं। उनकी सक्रियता की बड़ी वजह लोकसभा चुनाव लड़ने की इच्छा भी है। चुनावी गणित को भांपते हुए हरदा की नजर हरिद्वार और नैनीताल दोनों लोकसभा सीटों पर हैं, लेकिन उनका फोकस नैनीताल लोकसभा पर ही है। इसका बड़ा कारण इस लोकसभा सीट में उनके समर्थकों की अच्छी तादाद है। यही वजह है कि वे लोकसभा सीट पर सक्रियता बढ़ाए हुए हैं। राजनैतिक कार्यक्रमों के इतर काफल, आम पार्टी, विवाह समारोह, त्योहार, खेल या अन्य गतिविधियों में वे शिरकत करते नजर आते रहते हैं।

विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक हरदा ने नैनीताल लोकसभा के करीबी लोगों को चुनाव के लिए तैयार रहने के भी संकेत दिए हैं, लेकिन लोकसभा में हरदा के लिए टिकट की राह इतनी आसान नहीं है। नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और हरदा के बीच इन दिनों जुबानी जंग भी चल रही है। इंदिरा गुट चुनाव में बतौर उम्मीदवार हरदा को नहीं पचाएगा। यूथ कांग्रेस के चुनाव में भी नैनीताल लोकसभा में दोनों गुट बेहद सक्रिय रहे थे। इधर, चुनाव मोड पर हरदा का ‘हरीश रावत नैनीताल लोकसभा’ नाम का पेज भी संचालित हो रहा है। फेसबुक पेज की फे्रंड लिस्ट में शामिल 874 लोगों में अधिकांश लोकसभा के कार्यकर्ता या नेता हैं। देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव का बिगुल बजने के बाद लोकसभा सीट पर हरदा की बढ़ी सक्रियता क्या गुल खिलाती है। 
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मेरी लोकसभा चुनाव में दावेदारी नहीं है। अगर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का आदेश होगा तो उसका पालन किया जाएगा। एक सीमा के बाद आपकी इच्छा पर कुछ निर्भर नहीं रहता है। जहां तक सक्रियता की बात है तो पार्टी के सिपाही होने के नाते हर क्षेत्र में जाता हूं। मेरे चुनाव लड़ने का फैसला पार्टी लीडरशिप ही करेगी।
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- हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री

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