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बसपा से शहजाद का निष्कासन, भाजपा से दोस्ती ने ली बलि या फिर कोई डील      

Mon, 16 Jul 2018 07:15 AM IST
कुणाल दरगन , अमर उजाला, हरिद्वार
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शहजाद के साथ सीएम रावत व मदन कौशिक - फोटो : file photo
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पूर्व विधायक मोहम्मद शहजाद तीसरी दफा बसपा से बाहर किये गए हैं। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से मुलाकात के अगले दिन शहजाद के निष्कासन ने जिले की सियासत को नया मोड़ दे दिया है।

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माना जा रहा है कि शहजाद के घर शादी समारोह में भाजपाइयों का पहुंचना सिर्फ बहाना है। शहजाद को बाहर निकालने की स्क्रिप्ट यूपी के एक वरिष्ठ बसपा नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री पहले ही लिख चुके थे। सियासी गलियारों में चर्चा है कि यूपी के इस बसपा नेता ने शहजाद विरोधियों के साथ मिलकर कोई डील भी की है। 

बीस दिन शहजाद एक बार फिर हाथी पर सवार हुए थे। उस समय यह माना जा रहा था कि मुस्लिम समुदाय में शहजाद की मजबूत पकड़ के चलते बसपा को तीसरी बार उनकी शर्तों पर उन्हें पार्टी में लाना पड़ा। शहजाद की बसपा में तीसरी बार एंट्री से भाजपा और कांग्रेस में बेचैनी बढ़ गई थी। इस बीच जिला पंचायत की राजनीति को लेकर शहजाद की एक काबीना मंत्री से दोस्ती खूब चर्चा बंटोर रही थी। चर्चा यहां तक थी कि मौजूदा समय में जिला पंचायत की राजनीति एक बड़ा मोड़ ले सकती है लेकिन रविवार के राजनैतिक घटनाक्रम ने हर किसी को चौंका दिया।
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चूंकि भाजपा-बसपा के बीच दाल गलना संभव नहीं ता, ऐसे में पूर्व विधायक शहजाद से भाजपा की दोस्ती बसपा नेतृत्व को रास नहीं आई। सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि बसपा के एक कद्दावर नेता एवं यूपी पूर्व काबीना मंत्री शहजाद की एंट्री से नाखुश थे। दोनों के बीच लंबे अरसे से अदावत चली आ रही है। पूर्व काबीना मंत्री के साथ जिला पंचायत की राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले एक गुट से कोई बड़ी डील हुई है, जिनके मजबूत गठबंधन ने शहजाद के कदम एक फिर रोक दिए है।

यूपी के इसी धुरंधर के इशारे पर शहजाद को पार्टी से बाहर किया गया। जिला पंचायत  की  राजनीति में यदि बड़ा फेरबदल होता तो उसका नुकसान शहजाद विरोधी गुट को होना तय था। खुद मोहम्मद शहजाद भी किसी बड़ी डील की तरफ इशारा कर रहे हें। उनका यह कहना कि उनके निष्कासन की साजिश तो बसपा कार्यालय में रच ली गई थी। चर्चा है कि बसपा कांग्रेस और भाजपा के कुछ नेताओं ने मिलकर इस नई व्यूहरचना का ताना बाना बुना है।

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