पंजाब, महाराष्ट्र, यूपी से आकर चंद दिनों में रियल इस्टेट के स्टार बन रहे छह कारोबारी उत्तराखंड प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर आ गए हैं। इनमें कुछ विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े हैं। निदेशालय ने ऐसे लोग जिन्होंने कुछ सालों में काफी जमीनें खरीदी हैं, उन सफेदपोशों की असलियत जानने के लिए छानबीन शुरू की है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि कुछ लोगों ने दूसरे प्रांतों से आकर काला धन रियल इस्टेट में लगाया है। ऐसे करीब छह लोगों की प्रवर्तन निदेशालय ने गोपनीय छानबीन शुरू कर दी है। पता किया जा रहा है कि इनका दूसरे प्रांतों में क्या कारोबार था? उस कारोबार से कितना धन कमाया?
इन लोगों ने आयकर में क्या इनकम बताई है? मनी लॉंड्रिंग के लिए क्या तरीके अपनाए गए? निदेशालय दूसरे प्रांतों में इनकी करतूतों का काला चिट्ठा इकट्ठा कर रहा है। बताया गया कि ये लोग पहले आकर विभिन्न राजनीतिक दलों से जुड़े थे। फिर रियल इस्टेट में प्रवेश किया। चंद दिनों में ही रियल इस्टेट में लंबा-चौड़ा कारोबार फैला दिया।
प्रवर्तन निदेशालय इन लोगों की ‘सफेदपोशी’ के पीछे ‘कालिख’ में मनी लॉंड्रिंग की जड़ों की तह तक पहुंच रहा है। निदेशालय को उनके संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। इन लोगों ने जो खरीद-फरोख्त की है उसके कागजात भी इकट्ठे किए जा रहे हैं।
रियल इस्टेट में मची खलबली
कारोबारियों के प्रवर्तन निदेशालय के निशाने पर आने के बाद रियल इस्टेट कारोबार करने वालों में खलबली मच गई है। मनी लॉंड्रिंग के चक्कर में ईडी की गिरफ्त में न आ जाएं, इसके लिए लोगों ने बचाव के रास्ते तलाशने शुरू कर दिए हैं। लोग चार्टर्ड एकाउंटेंट और राजस्व अधिवक्ताओं से संपर्क कर रहे हैं। लोग अपना स्टेटस पता करने में लग गए हैं।
खुलेगी तहसीलों की भी पोल
ईडी की छानबीन में तहसीलों की कार्यप्रणाली की भी पोल खुल जाएगी। दाखिल-खारिज और खसरा-खतौनी के नंबरों में हो रही धांधली का सारा काला चिट्ठा खुल जाएगा। ईडी को तहसीलों में हो रहे जमीनों के फर्जीवाड़े के भी सुराग मिले हैं।
निदेशालय उन कागजात का भी अध्ययन करेगा जो तहसीलों में भूमि की खरीद-फरोख्त के वक्त बतौर शिकायती पत्र के रूप में दिए गए थे। यह माना जा रहा है कि रियल इस्टेट वाले विवादित जमीनों को औने-पौने खरीदते हैं और फिर कागजात दुरुस्त कराए जाते हैं।