प्रेमनगर में अब अतिक्रमण हटाने का अभियान नहीं चलेगा। स्थानीय व्यापारियों ने अभियान के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिस पर कोर्ट में स्टे दे दिया है। स्टे मिलने के बाद प्रेमनगर के व्यापारियों में खुशी की लहर है। व्यापारियों ने मिठाई बांटकर एक दूसरे को बधाई दी।
बता दें कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक साल बाद प्रशासन ने फिर से दून में सड़कों पर अतिक्रमण के खिलाफ अभियान शुरू किया है। अतिक्रमण हटाने के लिए मंगलवार को प्रशासन की टीम प्रेमनगर पहुंची थी। व्यापारियों के विरोध के कारण प्रशासन ने उन्हें तीन दिन का समय दिया था। व्यापारियों का कहना था कि हाईकोर्ट ने सड़कों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया है, न कि भूमि से।
उनका कहना था कि जहां पर प्रेमनगर में दुकानें बनाई गई थी, वह जमीन ग्राम समाज की है, जिस पर व्यापारी काबिज हैं। जिस पर प्रशासन ने उन्हें बेदखली का नोटिस दिया था। उनका कहना था कि व्यापारी अतिक्रमणकारियों की श्रेणी में नहीं आते हैं। इसको लेकर व्यापारियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
प्रेमनगर व्यापार मंडल के अध्यक्ष राजीव पुंज ने बताया कि हाईकोर्ट में उन्होंने यह बात विस्तार से रखी थी कि वह अतिक्रमण की श्रेणी में नहीं आते हैं, वह ग्राम समाज की भूमि पर कई सालों से काबिज हैं। इसलिए उन्हें अतिक्रमणकारी मानकर नहीं हटाया जा सकता है। कोर्ट ने उनकी बात मानकर उन्हें स्टे दिया है। उधर, एडीएम प्रशासन अरविंद पांडेय का कहना है कि हाईकोर्ट ने जो आदेश दिया है, जिला प्रशासन उसका पूरा पालन करेगा।