सामूहिक अवकाश के दौरान सभी कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटे जाने से उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति नाराज है। बुधवार को कैबिनेट में 10 सूत्रीय मांगपत्र की नौ लंबित मांगों पर विचार न होने से कर्मचारियों की नाराजगी और बढ़ी गई।
बाद में हुई समन्वय समिति संयोजक मंडल की आपात बैठक में सरकार के इस रुख की आलोचना की गई। साथ ही इसे कर्मचारियों का उत्पीड़न करार देकर फिर से आंदोलन छेड़ने का एलान किया गया।
सरकार ने निर्धारित तिथि के पांच दिन बाद सभी कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन जारी कर दिया है। लेकिन सामूहिक अवकाश के एक दिन का वेतन काम नहीं तो वेतन नहीं के सिद्धांत के तहत काट लिया गया है। उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक समन्वय समिति संयोजक मंडल की आपात बैठक में सरकार के इस रुख को कर्मचारियों का उत्पीड़न करार दिया गया। बैठक में कहा गया कि सरकार ने पहले हुई वार्ता में आश्वस्त किया था कि कर्मचारियों के लंबित मसलों पर विचार कर निर्णय लिया जाएगा।
सरकार ने यह वादा भी किया था कि कर्मचारियों का उत्पीड़न नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार ने अपना वादा तोड़ा है। प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में पदोन्नति में शिथिलीकरण एवं एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन स्कीम (एससीपी) और अन्य मसलों पर विचार नहीं किया गया।
कहा गया कि अब सरकार ऐसे संकेत दे रही है कि उसकी कर्मचारियों के लंबित मसलों को हल करने में कोई दिलचस्पी नहीं है। कर्मचारियों के पास अब अपने अधिकारों की खातिर विरोध दर्ज कराने के सिवाय कोई चारा नहीं है। बैठक में संयोजक मंडल के सदस्य दीपक जोशी, ठाकुर प्रहलाद सिंह, संतोष रावत, नवीन कांडपाल, सुनील दत्त कोठारी समेत कई अन्य संघों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
सरकार ने सभी कर्मचारियों का 30 दिन का वेतन जारी कर दिया है। एक दिन का वेतन रोका गया है। जैसे-जैसे आहरण वितरण अधिकारी कर्मचारियों की उपस्थिति की रिपोर्ट भेजेंगे। उसके आधार पर एक दिन का वेतन भी जारी कर दिया जाएगा।
-प्रकाश पंत, वित्त मंत्री