खटीमा के सात थारू जनजाति बहुल गांव स्मार्ट विलेज के रूप में विकसित होंगे। इसके लिए इन गांवों में खास इंतजाम किए हैं। साथ ही ग्रामीणों को बिजली, पानी और सड़क की सुविधा मिलेगी। बेहतर शिक्षा के लिए स्मार्ट क्लासें और मोबाइल हेल्थ यूनिट की भी सुविधा होगी। जनजातीय टूरिज्म बनने से देश-विदेश के पर्यटक भी आकर्षित होंगे।
वर्ष 2016 में छत्तीसगढ़ से शुरू हुई पीएम नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना श्यामा प्रसाद मुखर्जी रूर्बन (आत्मा गांव की सुविधाएं शहर जैसी) के तहत जिले में खटीमा के पहेनियां, सैंजना, कुटरा, भूरा किशनी, भुड़िया थारु, सबौरा, फुलैया गांव को चयनित किया गया, जिन्हें रूर्बन कलस्टर की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। इनकी आबादी 25-25 हजार है। ग्राम्य विकास विभाग की ओर से मनरेगा के सहयोग से कार्य भी शुरू करा दिए गए हैं।
सड़क और नालियों का निर्माण हो रहा है, जो मुख्य सड़कों से जुड़ेंगी। सोलर पंप बेस्ड वाटर सप्लाई लगेंगे। मोबाइल हेल्थ यूनिट और स्कूलों में स्मार्ट क्लासें संचालन को प्राथमिकता में रखा गया है। जनजातीय टूरिज्म की शुरूआत होने के साथ सीएससी सेंटर खुलेंगे और स्ट्रीट लाइटें भी लगेंगी। कृषि क्षेत्र में भी ग्रामीणों को तकनीकी कृषि के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। ये सभी गांव स्मार्ट सिटी की तरह स्मार्ट विलेज का मॉडल होंगे।
विदेशों में होगा हस्तशिल्प उत्पादों का एक्सपोर्ट
थारु बहुल गांवों में महिलाओं की ओर से बनाए जाने वाले पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद का देश के अलावा विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाएगा। महिलाएं मूंज घास से डलिया, बैग आदि हस्तशिल्प वस्तुएं बना भी रही हैं। ग्राम्य विकास विभाग उत्पाद बेचने व विदेशों में एक्सपोर्ट की व्यवस्था करेगा। इससे महिलाओं को घर बैठे स्वरोजगार मिल सकेगा।
खटीमा में रूर्बन कलस्टर बनाना है। सात थारु बहुल गांव चयनित किए हैं, जो स्मार्ट विलेज बनेंगे। सभी सुविधाएं देने के साथ मोबाइल हेल्थ यूनिट की सुविधा होगी। स्कूलों में स्मार्ट क्लासें चलेंगी। सभी गांव शहर के मुख्य मार्गों से जुड़ेंगे।
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हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक, ग्राम्य विकास विभाग रुद्रपुर