अब तक इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में रही सीएम चेहरे की बात जहां की तहां है। इससे हरीश गुट के समर्थकों में कहीं न कहीं मलाल है। कहा जा रहा था कि हरीश रावत ने खुद को सीएम चेहरा घोषित करने को लेकर यह दांव खेला था, लेकिन पार्टी हाईकमान ने मानने से इनकार कर दिया। इसके बाद खुद हरीश रावत ने यह बात मीडिया में आकर कही, पार्टी का चेहरा तो मैं ही रहूंगा, लेकिन मुख्यमंत्री कौन होगा, यह जीत दर्ज करने के बाद विधानमंडल दल के सदस्यों की राय लेने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी तय करेंगी। अब इस बात पर भी बहस छीड़ी है कि पार्टी चुनाव प्रचार कैंपेन के मुखिया तो हरीश पहले भी थे, लेकिन इस पूरी कवायद के बाद हरीश को मिला क्या है?
अनसुलझे हैं तमाम सवाल, इन पर कब होगी बात
हरीश रावत ने अपने ट्वीट में कहा था जिस समुद्र में तैरना है, सत्ता ने वहां कई मगरमच्छ छोड़ रखे हैं। जिनके आदेश पर तैरना है, उनके नुमाइंदे मेरे हाथ-पांव बांध रहे हैं। इशारा पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव और उनकी टीम की तरफ था। लेकिन अब जब कहा जा रहा है, सब कुछ ठीक हो गया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है, जबकि हरीश को इसी पुरानी टीम के साथ काम करना है तो अब वह कैसे तालमेल बिठाएंगे।
..तो क्या हटाए जाएंगे, नापसंद चेहरे
हरीश रावत ने संगठन के ढांचे को लेकर भी सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि संगठन का ढांचा ही अधिकांश स्थानों पर हाथ आगे बढ़ाने के बजाय या तो मुंह फेर करके खड़ा हो जा रहा है या नकारात्मक भूमिका निभा रहा है। उनका इशारा उन नेताओं की तरफ था, जो पहले से ही हरीश रावत के धुरविरोधी माने जाते हैं। इनमें कार्यकारी अध्यक्ष रणजीत रावत और कोषाध्यक्ष आयेंद्र शर्मा का नाम शामिल है। रावत का ट्वीट सामने आने के बाद हरीश के खासमखास सांसद प्रदीप टम्टा ने भी इन दोनों नेताओं के खिलाफ मोर्चो खोलते हुए तमाम सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि दोनों नेता लगातार पार्टी को कमजोर करते रहे हैं, उसके बाद भी उन्हें पदों पर बैठा दिया गया है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं, हरीश रावत की राहुल गांधी के साथ हुई लंबी गुफ्तगू में इस बात की भी जरूर चर्चा हुई होगी। आने वाले दिनों में इस मामले में पार्टी को फरमान जारी कर सकती है।
प्रीतम का जोर....सीएम का चेहरा बाद में तय होगा
दिल्ली में राहुल गांधी के साथ बैठक के बाद बाहर निकले सीएलपी नेता प्रीतम सिंह ने भी मीडिया से बातचीत की। अपने बयान में उन्होंने कहा कि हरीश रावत चुनाव कैंपेन समिति के चेयरमैन पहले भी थे और आगे भी बने रहेंगे। उन्होंने इस बात पर जोर देकर कहा कि सीएम का चेहरा बाद में तय होगा। फिलहाल सब मिलकर चुनाव लड़ेंगे। जो छोटी-मोटी समस्याएं थीं, वह सुलझा ली गई हैं।
हरीश रावत की मुझसे कोई नाराजगी नहीं है। चुनाव के समय में कुछ छोटी-मोटी बातें होती रहती हैं। अब सब ठीक है और सारे मसले सुलझा लिए गए हैं। हरीश रावत कैंपेन समिति के चैयरमैन हैं और वह पूरे चुनाव का कैंपेन लीड करेंगे। अब कोई मतभेद नही हैं। जो काम करता है, काम के तरीके में फर्क हो सकता है पर हमारा ध्येय एक है।
- देवेंद्र यादव, पार्टी प्रदेश प्रभारी, उत्तराखंड