1998 में नैनीताल सीट से भारतरत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत की बहू, केसी पंत की पत्नी इला पंत ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर कांग्रेस दिग्गज एनडी तिवारी को पराजित किया। उन्होंने कुमाऊं की पहली महिला सांसद होने का गौरव हासिल किया। यह वही चुनाव था, जब एनडी तिवारी देश की राजनीति के शिखर पर थे। राजनीति के विशेषज्ञ कहते हैं कि एनडी 1998 का चुनाव नहीं हारते तो देश के प्रधानमंत्री बनते। कांग्रेसी दिग्गज हरीश रावत की पत्नी रेणुका रावत ने वर्ष 2009 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर अल्मोड़ा सीट से लड़ा। भाजपा के बची सिंह रावत से चुनाव हार गईं। रेणुका रावत वर्ष 2014 में हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ीं, तब रमेश पोखरियाल निशंक ने रेणुका रावत को पराजित किया।
कुछ नहीं चढ़ पाईं विस की सीढ़ी, कुछ की जद्दोजहद जारी
अविभाजित उत्तर प्रदेश के दौर में वर्ष 1989 में पिथौरागढ़ विस सीट से कांग्रेस की रत्ना बिष्ट ने चुनाव लड़ा। मालदार परिवार की रत्ना बिष्ट जनता पार्टी के कमल किशन पांडे से चुनाव हार गईं। वर्ष 2012 में गंगोलीहाट सीट से भाजपा की गीता ठाकुर ने चुनाव लड़ा, वह कांग्रेस के नारायण राम से चुनाव हार गईं। इससे पहले गीता ठाकुर वर्ष 2002 का चुनाव गंगोलीहाट से निर्दलीय भी लड़ीं थीं। सल्ट सीट से कांग्रेस की गंगा पंचोली वर्ष 2017 और इस वर्ष उपचुनाव लड़ चुकी हैं। वह दोनों ही बार जीत हासिल नहीं कर सकीं। कांग्रेस की अंजू लुंठी वर्ष 2017 के विस चुनाव में पिथौरागढ़ सीट से भाग्य आजमाया लेकिन उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। हल्द्वानी सीट से भाजपा की रेनू अधिकारी 2012 में चुनाव लड़ीं लेकिन विधानसभा की दहलीज नहीं चढ़ पाईं। गीता ठाकुर, गंगा पंचोली, रेनू अधिकारी, अंजू लुंठी की जद्दोजहद अभी जारी है।