वाह्य सहायतित योजनाओं वाले प्रोजेक्टों के लिए फंडिंग में देरी की एक वजह पड़ोसी देश चीन के साथ आर्थिक मामलों की नीति में नए बदलाव भी माना जा रहा है। राज्य सरकार ने एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक(एआईआईबी) से तीन बड़े प्रोजेक्टों के लिए फंडिंग के प्रस्ताव भेजे।
इस अंतरराष्ट्रीय वित्तीय एजेंसी का मुख्यालय बीजिंग में है। केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को एआईआईबी से इतर दूसरी वित्तीय एजेंसी के लिए प्रस्ताव भेजने को कहा। राज्य सरकार ने फिर से नई एजेंसियों के प्रस्ताव भेजे। इसमें काफी समय जाया हुआ।
मंजूरी मिलती तो माहौल बनता
सियासी जानकारों का मानना है कि आठों प्रोजेक्ट के लिए प्रदेश सरकार यदि फंडिंग जुटा लेती तो विधानसभा चुनाव से पहले अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए उसके पास अच्छा मुद्दा होता।
ये हैं प्रोजेक्ट
प्रोजेक्ट - लागत - वित्तीय एजेंसी
जमरानी बहुउद्देश्यी पेयजल - 2584 - एडीबी
देहरादून-मसूरी परिवहन अवस्थापना - 1461 - एआईआईबी
एकीकृत बागवानी विकास - 251 - जीका
16 नगरों में अवस्थापना विकास - 1300 - एआईआईबी
टिहरी और जलागम क्षेत्र का विकास - 1200 - एनडीबी
हरित विकास प्रबंधन में नवाचार - 950 - एनडीबी
उत्तराखंड शहरी जल आपूर्ति - 1000 - एआईआईबी
ऊर्जा पारेषण सुदृढ़ीकरण एवं वितरण सुधार कार्यक्रम -753 -एडीबी
कुल - लागत - 9499
नोट: प्रोजेक्टों की लागत (करोड़ में)
कुछ परियोजनाओं पर वित्तीय एजेंसियों की सैद्धांतिक सहमति मिली है। आर्थिक मामलों के विभाग से पत्राचार चल रहा है। केंद्र सरकार ने कहा था कि वैकल्पिक एजेंसी के लिए प्रस्ताव भेजें। डीईए को लगातार लिखा जा रहा है।
- मनीषा पंवार, अपर मुख्य सचिव (नियोजन)