विधानसभा चुनाव में कई सियासी दल ऐसे हैं, जो दावे तो प्रदेश की सत्ता को उखाड़ फेंकने के कर रहे हैं, लेकिन यह दल 70 विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रत्याशी भी नहीं उतार सके हैं। इसमें उत्तराखंड क्रांति दल, समाजवादी पार्टी, बहुजन समाजवादी पार्टी और वामपंथी दल शामिल हैं।
उत्तराखंड का क्षेत्रीय दल यूकेडी अपनी राजनीतिक जमीन खोता जा रहा है। 42 साल से भी अधिक वर्षों से राजनीति में उतरे सक्रिय इस क्षेत्रीय दल का पिछले कुछ चुनावों में जनाधार गिरा है। वर्ष 2002 में दल के चार विधायक विधानसभा पहुंचे। जो 2007 के चुनाव में तीन विधायकों पर आ गए।
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जबकि 2012 में यूकेडी का मात्र एक विधायक विधानसभा पहुंचा, लेकिन अब स्थिति यह है कि इस चुनाव में दल 70 विधानसभा सीटों पर इतने प्रत्याशी भी मैदान में नहीं उतार पाया है। दल ने 70 में से 48 सीटों पर चुनाव में प्रत्याशी उतारे हैं। उत्तराखंड समानता पार्टी ने तो एक भी सीट से प्रत्याशी नहीं उतारा। जो इस चुनाव में उक्रांद को अपना समर्थन दिए हुए है। जबकि समाजवादी पार्टी ने 56 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।
माकपा ने चार सीटों सहसपुर, रानीपुर, केदारनाथ और थराली विधान सभा सीट से प्रत्याशी उतारा है। भाकपा ने गंगोत्री, बद्रीनाथ, रुद्रप्रयाग और नरेंद्रनगर एवं भाकपा माले ने कर्णप्रयाग और लालकुंआ सीट से प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरा है। हालांकि बहुजन समाजवादी पार्टी का दावा है कि उसने सभी 70 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं।