प्रदेश के दुर्गम इलाकों में ही नहीं, शहरी इलाकों में लोगों को बूथ तक लाना ज्यादा मुश्किल काम है। निर्वाचन विभाग की ओर से वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में हर विधानसभा में एक-एक सबसे कम मतदान वाले बूथों को चिन्हित किया गया। इससे पता चलता है कि कई वीआईपी माने जाने वाले इलाकों में वोटरों को बूथ तक आने में अपेक्षाकृत कम दिलचस्पी होती है।
देहरादून के रायपुर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली डिफेंस कालोनी में पिछले चुनाव में इस विधानसभा का सबसे कम 40.73 प्रतिशत मतदान हुआ था। देहरादून कैंट सीट के न्यू फॉरेस्ट बूथ पर इस विधानसभा क्षेत्र का सबसे कम 22.42 प्रतिशत मतदान हुआ था। हरिद्वार के बीएचईएल रानीपुर के टीएचडीसी ऑफिस बूथ पर सबसे कम 23.96 प्रतिशत मतदान हुआ था।
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दुर्गम इलाकों की बात करें तो पिथौरागढ़ की धारचूला सीट के क्वारिजिमिया बूथ पर महज 1.94 प्रतिशत ही मतदान हुआ था। इसी प्रकार, नैनीताल जिले में भीमताल सीट पर कौंटा नाम का बूथ ऐसा था, जिस पर महज 1.35 प्रतिशत मतदान हुआ था। टिहरी की घनसाली विधानसभा सीट पर अर्श नाम के बूथ पर 10.10 प्रतिशत ही मतदान हुआ था।
निर्वाचन विभाग की स्वीप टीम ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी सौजन्या के निर्देशों पर राज्य समन्वय मोहम्मद असलम के नेतृत्व में इन सबसे कम पोलिंग वाले बूथों पर लगातार पांच साल तक काम किया है। अभी भी लोगों को ज्यादा से ज्यादा जागरूक करने का काम किया जा रहा है ताकि मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हो।