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उत्तराखंड चुनाव 2022: आप ने स्वास्थ्य सेवाओं पर उठाया सवाल, कहा- सीएजी की रिपोर्ट के मुताबिक घट गया स्वास्थ्य सेवाओं का बजट

Tue, 31 Aug 2021 03:02 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

आप के प्रदेश कार्यालय में कोठियाल ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट के तहत स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखंड केवल 6.8 प्रतिशत बजट खर्च करता है। जबकि जम्मू में यह आंकड़ा 7.7 प्रतिशत, हिमाचल में 7.6 प्रतिशत और दिल्ली में 16.8 प्रतिशत है।
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नेता कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी ने उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को पलायन की वजह बताते हुए सवाल खड़ा किया है। आप के नेता कर्नल (रिटायर्ड) अजय कोठियाल ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो रहा है कि राज्य सरकार ने किस तरह से स्वास्थ्य का बजट घटा दिया है। उनकी सरकार सत्ता में आई तो प्रदेश के दुर्गम इलाकों तक डॉक्टर और चिकित्सकीय सुविधाएं उपलब्ध कराएगी।

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सोमवार को आप के प्रदेश कार्यालय में कोठियाल ने कहा कि सीएजी की रिपोर्ट के तहत स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखंड केवल 6.8 प्रतिशत बजट खर्च करता है। जबकि जम्मू में यह आंकड़ा 7.7 प्रतिशत, हिमाचल में 7.6 प्रतिशत और दिल्ली में 16.8 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में राज्य सरकार का स्वास्थ्य बजट 188 करोड़ था जो कि 2019-20 में घटाकर 97 करोड़ कर दिया गया।

पर्वतीय जिलों के कई अस्पतालों में डॉक्टरों, दवाइयों और मशीनों का अभाव बना हुआ है। गर्भवती महिलाओं को बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की वजह से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य और शिक्षा का अभाव पहाड़ों में हो रहे पलायन का मुख्य कारण है। स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार को स्वास्थ्य में ज्यादा से ज्यादा खर्च करना चाहिए।
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धारचूला में आई आपदा के मद्देनजर उन्होंने एयर एंबुलेंस न होने का मुद्दा भी उठाया और कहा कि जनता के लिए ऐसे हालात में तत्काल स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने को एयर एंबुलेंस होनी चाहिए।

केदारनाथ का सच सरकार ने छुपाया
कोठियाल ने कहा कि उन्होंने केदारनाथ पुनर्निर्माण में काम किया है। वहां के हालात देखकर यह साफ है कि तत्कालीन सरकार ने केदारनाथ आपदा का सच छुपाया है। उन्होंने कहा कि मृतक श्रद्धालुओं के जो आंकड़े सरकार ने जारी किए, उससे कम से कम पांच गुना अधिक लोगों की मौत वहां हुई थी। आज भी कंकाल मिलना इसका प्रमाण है।

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