नैनीताल हाईकोर्ट ने शिक्षा सचिव भूपेंदर कौर औलख को कर्मचारियों के बढ़े हुए भत्तों का भुगतान न करने के मामले में जारी अवमानना के चार्ज से मुक्त कर दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने इस याचिका को निस्तारित कर दिया है।
सोमवार को न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं शिक्षा सचिव ने कहा कि उन्होंने कर्मचारियों के बढ़े हुए भत्तों का भुगतान कर दिया है। कोर्ट ने पूर्व में आदेश का पालन न होने पर शिक्षा सचिव भूपेंदर कौर औलख को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश देते हुए कहा था कि उनके खिलाफ अवमानना के आरोप में चार्ज फ्रेम किया जाएगा।
यह आदेश काशीपुर निवासी सुभाष और पांच अन्य की ओर से हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका पर दिया गया था। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उनकी नियुक्ति संविदा पर सर्व शिक्षा अभियान में कंप्यूटर ऑपरेटर और कंप्यूटर प्रोग्रामर के पद पर हुई थी। सरकार ने 11 मार्च 2005 को ये पद सृजित किए थे। इस शासनादेश में कहा गया था कि उनको बढ़ी हुई दरों पर भत्ते दिए जाएंगे। उनको बढ़े हुए अन्य भत्ते नहीं दिए गए।
10 जून 2013 को हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को निर्देश दिए थे कि आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं को भत्ते दें। सरकार ने कोर्ट में स्पेशल अपील दायर की थी। कोर्ट ने इस अपील को खारिज कर दिया तो सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के माध्यम से चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने छह दिसंबर 2016 को सरकार की अपील को खारिज कर दिया था। 17 जुलाई 2017 को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी।